नारी शक्ति वंदन अधिनियम: केवल संख्याबल नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का संकल्प

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: केवल संख्याबल नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का संकल्प

संसद के निचले सदन में महिला आरक्षण बिल पर हुई लंबी चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की राजनीति में अब महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आंकड़ों के जरिए बताया कि देश की 6700 ब्लॉक पंचायतों में से लगभग 2700 का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर नेतृत्व का स्वरूप बदल रहा है।

प्रधानमंत्री के भाषण के मुख्य बिंदु:

  1. सबका साथ, सबका विकास: नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी इस मंत्र को पूर्णता प्रदान करेगी।
  2. ऐतिहासिक भरपाई: अतीत में जो समय बर्बाद हुआ, यह बिल उसकी भरपाई का माध्यम बनेगा।
  3. कार्यकुशलता में वृद्धि: महिलाओं के अनुभव जब सदन का हिस्सा बनेंगे, तो विधायी कार्यों की कुशलता कई गुना बढ़ जाएगी।

सदन में देर रात तक चली यह कार्यवाही केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह दर्शाती थी कि महिला सशक्तिकरण अब राष्ट्र की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर है। प्रधानमंत्री ने उन लोगों को चेतावनी भी दी जो इस बदलाव का विरोध कर सकते हैं, साथ ही राज्यों को आश्वस्त किया कि परिसीमन की प्रक्रिया निष्पक्ष रहेगी।

आधी रात के बाद तक चली लोकसभा: महिला आरक्षण बिल पर सर्वसम्मति की अपील, पीएम ने बताया देश की जरूरत

  • कार्यवाही: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए सदन की कार्यवाही रात 1:20 बजे तक चली।
  • सराहना: स्पीकर ओम बिरला ने महिला सांसदों की भारी उपस्थिति को सराहा।
  • पीएम का आह्वान: प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण को सर्वसम्मति से पास करने की अपील की।
  • मुख्य वक्ता: अमित शाह, प्रियंका गांधी और कंगना रनौत सहित कई प्रमुख नेताओं ने चर्चा में भाग लिया।
  • आश्वासन: कानून लागू करते समय राज्यों के अधिकारों और पुराने परिसीमन अनुपातों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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