केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी नरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली किस्त के रूप में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 17,744.19 करोड़ रुपये जारी किए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस राशि का उपयोग मजदूरी भुगतान के लिए किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनरेगा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह धनराशि जारी की गई है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि इन फंड्स का समयबद्ध और प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि मजदूरों को भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। साथ ही उन्होंने बताया कि सामग्री और प्रशासनिक मदों के लिए भी आवश्यक धन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्य निरंतर जारी रह सके।
शिवराज सिंह चौहान ने मजदूरों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने और उनके वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर पर्याप्त कार्य उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी भी श्रमिक को रोजगार के लिए प्रतीक्षा न करनी पड़े।
उन्होंने कहा कि रोजगार की मांग करने वाले प्रत्येक श्रमिक को निर्धारित समय सीमा के भीतर काम उपलब्ध कराया जाना चाहिए और सभी स्तरों पर मजदूरी का भुगतान समय पर किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कार्यस्थलों के बेहतर प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि पात्र ग्रामीण परिवारों को जॉब कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इच्छुक परिवारों को तय समय सीमा में रोजगार उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि कोई भी पात्र परिवार आजीविका के अवसरों से वंचित न रहे। उन्होंने वर्तमान समय को बदलाव का दौर बताते हुए कहा कि मनरेगा के तहत रोजगार बनाए रखना जरूरी है और साथ ही वीबी-जी राम जी ऐक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयारी भी पूरी की जानी चाहिए।
वीबी-जी राम जी ऐक्ट के संबंध में उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी देना है, जिससे सशक्त और दूरदर्शी ग्रामीण विकास ढांचा तैयार किया जा सके। उन्होंने राज्यों से अपील की कि इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी प्रारंभिक तैयारियां निर्धारित समय के भीतर पूरी की जाएं।