केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को लखनऊ में उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान कृषि क्षेत्र की नीतियों और योजनाओं पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने, खेती में विविधता लाने और छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
मंत्री ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। इसके साथ ही किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विविध खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज और बाजार से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड, फार्मर आईडी और डिजिटल कृषि प्रणालियों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनसे किसानों को ऋण, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब वैज्ञानिक ज्ञान सीधे खेतों तक पहुंचेगा।
उत्तर प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के साथ मिलकर कई कदम उठाए हैं। आलू की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर एमआईएस योजना के तहत 20 लाख मीट्रिक टन आलू की खरीद की अनुमति दी गई है। इसके अलावा आलू उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए राज्य में एक अंतरराष्ट्रीय प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा।
बागवानी क्षेत्र में सुधार के लिए देश में 9 क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता और रोगमुक्त पौधे मिल सकेंगे। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की संभावना है।
उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बावजूद किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी स्वीकृत की है। इसके तहत यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध रहेगा।
नकली बीज और कीटनाशकों पर रोक लगाने के लिए सरकार सख्त कानून बनाने की दिशा में काम कर रही है। मंत्री ने कहा कि इस तरह की अनियमितताएं कृषि के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य दोनों पर असर डालता है। इसलिए प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को संक्रमण अवधि में आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार कृषि और निर्यात की रणनीतियां तैयार की जा रही हैं, ताकि किसानों को बेहतर बाजार मिल सके। लखनऊ में आयोजित यह सम्मेलन आगामी कृषि नीतियों और योजनाओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।