अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की श्रमिकों के लिए बड़े कल्याणकारी कदमों की घोषणा

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की श्रमिकों के लिए बड़े कल्याणकारी कदमों की घोषणा

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के विशेष अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के समस्त श्रमिक वर्ग को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि शासन श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और उनके सर्वांगीण उत्थान के लिए पूरी तरह समर्पित है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार मजदूरों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर नई योजनाओं पर कार्य कर रही है।

श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘संबल योजना’ के अंतर्गत अब तक 1.80 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र के कामगारों का पंजीकरण किया जा चुका है। योजना की सफलता का प्रमाण देते हुए उन्होंने साझा किया कि अब तक 8 लाख से अधिक मामलों में ₹7720.07 करोड़ की वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई गई है। महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में अब इस योजना के दायरे में ‘गिग वर्कर्स’ को भी सम्मिलित कर लिया गया है। साथ ही, वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डीबीटी (DBT) और चेक के माध्यम से भुगतान की सुरक्षित व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

श्रमिकों के कार्यबल नियमों में किए गए सुधारों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. यादव ने कहा कि सवैतनिक अवकाश की पात्रता अब 240 दिनों के बजाय 180 दिन कार्य करने पर ही प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को भी 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया गया है। वर्तमान में ई-श्रम पोर्टल पर राज्य के 1.93 करोड़ से ज्यादा श्रमिक पंजीकृत हैं। बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में सरकार ने 14 वर्ष तक के बच्चों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, जबकि 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए जोखिम भरे उद्योगों में कार्य करना वर्जित है।

शिक्षा और भविष्य निर्माण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिकों के बच्चों के लिए ‘श्रमोदय आवासीय विद्यालयों’ में उच्च स्तरीय निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। इन विद्यालयों के माध्यम से छात्रों को JEE, NEET और रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के विशेष अवसर मिल रहे हैं। इसके अलावा, तकनीकी प्रशिक्षण, मुफ्त आवास और रियायती दरों पर भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

अंत में मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री जनकल्याण शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के लिए शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जा रही है। श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक मदद, आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। साथ ही, उनके ठहरने के लिए विश्राम गृह और रैन बसेरों का निर्माण कर उनके जीवन स्तर को सुधारने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

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