अन्नदाताओं के द्वार पहुँचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव; केंद्रों पर खुद तुलवाया गेहूं, बोले- किसानों का सम्मान और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

अन्नदाताओं के द्वार पहुँचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव; केंद्रों पर खुद तुलवाया गेहूं, बोले- किसानों का सम्मान और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को स्वयं मैदान में उतरे। खरगोन और शाजापुर जिलों के गेहूं उपार्जन केंद्रों पर औचक निरीक्षण के लिए पहुँचे मुख्यमंत्री ने न केवल व्यवस्थाओं का बारीकी से मुआयना किया, बल्कि किसानों के साथ चाय पीकर उनसे फीडबैक भी लिया। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को सम्मान और सुविधाएं मिलना राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

खरगोन के कतरगांव केंद्र पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गेहूं खरीदी के लिए जारी किए गए नए मापदंडों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने तौल की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए पर्याप्त संख्या में तौल कांटे और श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद करते हुए ओटीपी के माध्यम से होने वाले भुगतान और स्लॉट बुकिंग की डिजिटल प्रक्रिया के बारे में भी पूछताछ की। उन्होंने कहा कि “हमारी सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।”

शाजापुर जिले के मकोड़ी स्थित उपार्जन केंद्र पर मुख्यमंत्री का संवेदनशील व्यवहार देखने को मिला, जब उन्होंने स्वयं ट्रैक्टर-ट्रॉली पर चढ़कर उपज का निरीक्षण किया और किसान दीपक व राहुल से खेती-किसानी पर चर्चा की। डॉ. यादव ने किसानों को राहत देते हुए साझा किया कि उपार्जन की अवधि अब 23 मई तक बढ़ा दी गई है, जिससे किसी भी किसान को हड़बड़ी करने की आवश्यकता नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान न केवल कृषि बल्कि पशुपालन और डेयरी विकास जैसे विषयों पर भी किसानों से विचार-साझा किए। उन्होंने केंद्रों पर कार्यरत स्व-सहायता समूह की महिलाओं से भी संवाद किया और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जानी। आकस्मिक निरीक्षण के इस अभियान ने प्रशासनिक अमले को सतर्क कर दिया है। मुख्यमंत्री के साथ इस दौरे में क्षेत्रीय विधायक और संभाग के वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्हें प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी गई है।

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