गुवाहाटी में मंगलवार को आयोजित एक गरिमामय समारोह में हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण के साथ ही सरमा असम के राजनीतिक इतिहास में लगातार दो बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं।
राज्य में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन की यह लगातार तीसरी सरकार है। ज्ञात हो कि रविवार को एनडीए विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के बाद राज्यपाल ने उनकी नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया था। इससे पहले साल 2016 में भाजपा ने सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में पहली बार असम में सरकार बनाई थी, जिसके बाद 2021 में सत्ता की कमान हिमंता बिस्वा सरमा को सौंपी गई थी।
इस उच्च स्तरीय समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। साथ ही, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
सरमा का राजनीतिक उत्कर्ष साल 2015 में शुरू हुआ, जब उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर अमित शाह के मार्गदर्शन में भाजपा की सदस्यता ली थी। उस दौर में राज्य विधानसभा में भाजपा की शक्ति सीमित थी, लेकिन सरमा की रणनीतिक कार्यकुशलता ने पूर्वोत्तर में पार्टी की जड़ें मजबूत कर दीं। 2016 में उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक नियुक्त किया गया, जिसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़कर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया।
शिक्षा और करियर की बात करें तो डॉ. सरमा ने अपनी पूरी पढ़ाई गुवाहाटी में संपन्न की है। कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री ली। वकालत के अनुभव के साथ-साथ उन्होंने 2006 में गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी भी पूर्ण की। उनका शोध कार्य पूर्वोत्तर परिषद (NEC) की संरचना और विकास पर केंद्रित था।
उनका सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति की उपज है। 90 के दशक के शुरुआती वर्षों में वह कॉटन कॉलेज छात्र संघ और ‘आसू’ (AASU) से जुड़े रहे। साल 2001 में जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले सरमा आज भी उसी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वहां से अपराजित बने हुए हैं।