नर्मदापुरम पुलिस की बड़ी सफलता: झारखंड के देवघर से दो अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरफ्तार, ₹3 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का खुलासा

नर्मदापुरम पुलिस की बड़ी सफलता: झारखंड के देवघर से दो अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरफ्तार, ₹3 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का खुलासा

मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों के विरुद्ध पुलिस ने एक और महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। नर्मदापुरम जिले की बनखेड़ी थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने झारखंड के देवघर जिले में दबिश देकर दो शातिर अंतर्राज्यीय अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर एक व्यक्ति के बैंक खाते से अवैध रूप से 3 लाख 09 हजार 917 रुपये की ऑनलाइन ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड भी बरामद किए हैं।

घटनाक्रम के अनुसार, बनखेड़ी निवासी 45 वर्षीय छोटेलाल कुशवाह ने 17 मार्च को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि अज्ञात अपराधियों ने उनके बैंक खाते से करीब 3.10 लाख रुपये का ऑनलाइन गबन कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस. थोटा के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और साइबर विश्लेषण की मदद से जब ठगों का सुराग मिला, तो पुलिस टीम 2 मई को झारखंड के लिए रवाना हो गई।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण और गोपनीय रही। पुलिस टीम ने आरोपियों के निवास क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक भेष बदलकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। पूरी पुष्टि होने के बाद 7 मई की देर रात पुलिस ने घेराबंदी कर उमेश दास (30 वर्ष) और उत्तम कुमार दास (23 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर क्षेत्र के निवासी हैं। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे तकनीक का सहारा लेकर भोले-भाले नागरिकों को अपना निशाना बनाते थे।

ठगी के तरीके का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी पीड़ितों को मोबाइल पर एक संदिग्ध APK फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को इंस्टॉल करता, आरोपी उसके मोबाइल का पूरा एक्सेस प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद वे पीड़ित के नंबर की ‘eSIM’ तैयार कर लेते थे, जिससे बैंक के ओटीपी और अलर्ट सीधे अपराधियों के पास पहुंचने लगते थे। इसी तकनीक से उन्होंने छोटेलाल के पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए थे। पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर सूचना दें।

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