उत्तर प्रदेश का बांदा शहर 48 डिग्री सेल्सियस के साथ दुनिया का तीसरा सबसे गर्म स्थान बना, देश के कई राज्यों में भीषण लू का प्रकोप
देश के कई हिस्सों में इस समय प्रचंड गर्मी और लू (हीटवेव) का प्रकोप देखा जा रहा है। आगामी 25 मई से नौतपा की शुरुआत होने वाली है, किंतु इससे पहले ही देश के कई इलाकों में तापमान ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बुधवार, 20 मई को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके साथ ही यह उस दिन वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे गर्म शहर बन गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दिन बांदा से अधिक तापमान केवल मिस्र के असवान (49.4°C) और सऊदी अरब के अराफात (48.4°C) में रिकॉर्ड हुआ। वहीं, मध्य प्रदेश का खजुराहो 47.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ दुनिया के शीर्ष पांच सबसे गर्म शहरों की सूची में चौथे स्थान पर रहा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान और थार मरुस्थल की ओर से आ रही शुष्क और अत्यंत गर्म हवाएं सीधे उत्तर भारत के मैदानी भागों में प्रवेश कर रही हैं। यही कारण है कि मई के उत्तरार्ध में ही लोगों को जून के महीने जैसी अत्यधिक तपन का सामना करना पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने इस अत्यधिक गर्मी का मानव स्वास्थ्य और व्यवहार पर भी गहरा असर होने की बात कही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वातावरणीय तापमान में अत्यधिक वृद्धि होने से मानव शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अधिक ऊर्जा व्यय करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया के कारण मस्तिष्क में ‘फील गुड’ हार्मोन का संतुलन प्रभावित होता है, जिससे लोगों में चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, एकाग्रता की कमी और अनिद्रा जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश ने इस भौगोलिक घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बांदा में देश का सर्वाधिक तापमान दर्ज होने के पीछे मुख्य कारण इसकी कर्क रेखा से नजदीकी है। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में सूर्य की किरणें सीधे पड़ना, आसमान का पूरी तरह साफ होना, पठारी भूभाग की मिट्टी में नमी की भारी कमी, स्थानीय नदियों का सूखना, वनों की अत्यधिक कटाई तथा अनियंत्रित खनन भी इस भीषण तपन के प्रमुख उत्तरदायी कारक हैं। दूसरी ओर, दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति पिछले तीन दिनों से अंडमान-निकोबार और कोलंबो के समीप थमी हुई है, जिसे आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि गुरुवार से पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मौसम करवट ले सकता है, जिससे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी वर्षा हो सकती है, जबकि देश के शेष हिस्से भीषण गर्मी से जूझते रहेंगे।
देश के विभिन्न राज्यों की स्थिति पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश के बांदा में वर्ष 1951 के बाद मई महीने का यह सबसे अधिक तापमान है, और साल 2026 में यह चौथी बार देश का सबसे गर्म स्थान घोषित हुआ है। मध्य प्रदेश के खजुराहो में भी 34 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है, जहां इससे पहले 29 अप्रैल 1993 को 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा था। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पारा 46 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, और राज्य के आधे हिस्से में रेड अलर्ट जारी है। हरियाणा के रोहतक में 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर के सांबा में तापमान सामान्य से 7 डिग्री अधिक यानी 45.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, वहीं हिमाचल प्रदेश के ऊना में पारा 44 डिग्री सेल्सियस और उत्तराखंड के देहरादून में 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को मुस्तैद किया गया है। ओडिशा के झारसुगुड़ा में भी तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि बिहार के कुछ जिलों में हीटवेव के रेड अलर्ट के बीच 23 जिलों में वर्षा की संभावना भी जताई गई है। इसके विपरीत, गुजरात के सूरत में तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने से स्थानीय निवासियों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है।