फाल्टा विधानसभा उपचुनाव: भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु पांड्या की ऐतिहासिक जीत, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जनता के प्रति जताया आभार

फाल्टा विधानसभा उपचुनाव: भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु पांड्या की ऐतिहासिक जीत, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जनता के प्रति जताया आभार

पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुए पुनर्मतदान के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार देबांग्शु पांड्या ने एक बड़ी जीत दर्ज की है। इस शानदार सफलता के बाद सूबे के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोला और फाल्टा के मतदाताओं का विशेष रूप से धन्यवाद किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी चर्चा में रहने वाला ‘डायमंड हार्बर’ मॉडल अब पूरी तरह से ‘तृणमूल के विनाश’ का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने फाल्टा की जनता के इस फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के मतदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे फाल्टा की उस देवतुल्य जनता के आगे आदरपूर्वक सिर झुकाते हैं, जिन्होंने एक मजबूत जनादेश देकर भाजपा प्रत्याशी श्री देबांग्शु पांड्या की विधानसभा में एंट्री पक्की की है। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्होंने चुनावी जनसभाओं में जनता से भाजपा उम्मीदवार को कम से कम एक लाख वोटों के फासले से जिताने का अनुरोध किया था। क्षेत्र के सजग मतदाताओं ने उनकी इस बात का मान रखते हुए जीत का यह अंतर 1 लाख 8 हजार वोटों से भी ऊपर पहुंचा दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार विकास कार्यों के जरिए जनता के इस भरोसे का कर्ज चुकाएगी और फाल्टा को एक आदर्श व समृद्ध क्षेत्र बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दल के पास न तो कोई ठोस सिद्धांत बचा था और न ही कोई विचारधारा, वह अब महज एक ‘माफिया संस्था’ बनकर रह गया है। सत्ता से बेदखल होने के बाद इस पार्टी का वास्तविक और खोखला चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र का बेजा इस्तेमाल करके इस दल ने आम लोगों की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने को जमकर लूटा। पूरे प्रदेश को अपनी बपौती समझने वाले इन नेताओं ने सिंडिकेट राज और डराने-धमकाने की राजनीति के दम पर व्यवस्था पर कब्जा कर रखा था।

मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना निशाना साधते हुए कहा कि अचानक उभरकर खुद को ‘कमांडर’ घोषित करने वाले एक धोखेबाज शख्स ने हर तरह के अपराधों को अंजाम दिया। अपनी आपराधिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘शेर की खाल में छिपी इस बिल्ली’ ने लोकतांत्रिक मूल्यों का बेरहमी से दमन किया। यही वजह थी कि पिछले चुनावों को एक तमाशा बनाकर तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र में 1.5 लाख वोटों की फर्जी बढ़त हासिल कर ली थी। हालांकि, पूरे 15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद जब इस बार स्थानीय लोगों को बिना किसी डर के मतदान करने की स्वतंत्रता मिली, तो सच्चाई सबके सामने आ गई।

अपने बयान के आखिर में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह तो सिर्फ एक शुरुआत है और आने वाले समय में इस दल को जनता द्वारा पूरी तरह खारिज किए जाने का एक लंबा दौर देखना होगा। उन्होंने दावा किया कि भविष्य के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व को ‘नोटा’ (None of the Above) से भी कड़ी टक्कर मिलने वाली है। उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पहले भी त्रिपुरा के विधानसभा चुनावों में ‘नोटा’ से कम वोट पाकर पिछड़ चुकी है। पश्चिम बंगाल के नागरिक भी आने वाले दिनों में अपनी धरती पर टीएमसी और नोटा के बीच ऐसी ही दिलचस्प लड़ाई देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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