अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीयों के विरुद्ध होने वाली नस्लीय बयानबाजी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे मूर्खतापूर्ण कृत्य करार दिया है। भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए रुबियो ने रविवार को अपनी यात्रा के दूसरे दिन भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका सदैव बाहरी लोगों का स्वागत करने वाला देश रहा है और वहां के वीजा नियमों में किए जा रहे बदलाव किसी विशेष राष्ट्र को लक्षित करके नहीं किए गए हैं।
नस्लीय टिप्पणियों से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वह इस विषय को अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि संसार के प्रत्येक हिस्से में कुछ नासमझ लोग मौजूद होते हैं और ऐसे तत्व भारत के साथ-साथ अमेरिका में भी हैं जो इस तरह की बेतुकी बातें करते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अमेरिकी समाज समावेशी है, जहां वैश्विक स्तर से आए लोगों ने न केवल खुद को ढाला है बल्कि वहां की तरक्की में भी अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रवासियों की भूमिका की सराहना करते हुए बताया कि भारतीय कंपनियों ने वहां 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसके और आगे बढ़ने की उम्मीद है।
वीजा और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों में किए जा रहे संशोधनों पर चर्चा करते हुए मार्को रुबियो ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि विगत कुछ वर्षों में तकरीबन 2 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश किया है, जिसके कारण मौजूदा आव्रजन व्यवस्था में सुधार करना अनिवार्य हो गया था। उन्होंने साफ किया कि जे1, एफ1 और एच1बी वीजा नियमों में किए गए हालिया बदलाव वैश्विक स्तर पर लागू हैं, न कि केवल भारत के लिए। भारत से बड़ी संख्या में उच्च कुशल पेशेवर अमेरिका जाते हैं, इसलिए इस नई नीति का प्रभाव यहां अधिक दिखाई दे सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी आव्रजन प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बना रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कुछ व्यावहारिक दिक्कतें और चुनौतियां आना स्वाभाविक है, क्योंकि किसी भी तंत्र के बदलाव में एक संक्रमण काल (ट्रांजिशन पीरियड) होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब यह सुधार प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब यह प्रणाली पहले से कहीं अधिक प्रभावी, कुशल और टिकाऊ सिद्ध होगी, जो भारत से आने वाले कामकाजी लोगों और अन्वेषकों (इनोवेटर्स) के लिए भी लाभकारी रहेगी।