भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, देश में अगले सात दिनों के भीतर मानसून के दस्तक देने की संभावना है। श्रीलंका में हवा का दबाव कम होने के कारण मानसून पिछले पांच दिनों से वहीं ठहरा हुआ है। दक्षिण भारत के तटीय और आस-पास के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर) विकसित नहीं हो पाने की वजह से मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने की गति नहीं मिल पा रही है।
मौसम विभाग ने इस वर्ष देश में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका जताई है। आईएमडी ने एक महीने पहले जारी किए गए अपने पुराने पूर्वानुमान में संशोधन किया है। नए आकलन के मुताबिक, साल 2026 के मानसूनी सीजन में देश के भीतर औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की जा सकती है, जबकि इससे पहले 13 अप्रैल को जारी अनुमान में विभाग ने इसे 80 सेंटीमीटर रहने की बात कही थी।
वर्ष 1971 से 2020 तक के दीर्घकालिक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो भारत में औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। चालू वर्ष में कुल मानसूनी बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। मौसम विज्ञान के नियमों के अनुसार, 100 प्रतिशत एलपीए को ही देश में सामान्य वर्षा का पैमाना माना जाता है।
इसके साथ ही, आईएमडी ने जून और जुलाई के महीनों में भी देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहने की चेतावनी दी है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में इस अवधि के दौरान तीव्र लू (हीटवेव) चलने की आशंका है। इन महीनों में आमतौर पर रहने वाले 30 से 35 डिग्री के सामान्य तापमान के मुकाबले इस बार पारा तीन डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है।
क्षेत्रीय पूर्वानुमान की बात करें तो मौसम विभाग के मुताबिक जून के दौरान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से भी काफी कम पानी बरसने के आसार हैं। इसके विपरीत, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ चुनिंदा इलाकों में सामान्य वर्षा होने की उम्मीद जताई गई है।
केरल में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग का शुरुआती अनुमान इस बार सही साबित नहीं हुआ है। मानसून पिछले पांच दिनों से केरल के समुद्र तट से महज 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर थमा हुआ है और आगामी दो-तीन दिनों तक इसके आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां नहीं दिख रही हैं। इससे पहले 15 मई को विभाग ने दावा किया था कि मानसून अपनी निर्धारित तारीख (1 जून) से पांच दिन पहले यानी 26 मई को ही केरल तट पर पहुंच जाएगा। मामले पर आईएमडी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने स्पष्ट किया कि अब अगले सात दिनों के भीतर मानसून के केरल पहुंचने की उम्मीद की जा सकती है।
पिछले वर्ष की तुलना करें तो साल 2025 में मानसून अपने तय समय से आठ दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल आ गया था। सामान्य तौर पर मानसूनी हवाएं केरल से आगे बढ़ते हुए मध्य जून तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आसमान पर छा जाती हैं। इसके बाद 11 जून तक मुंबई और आठ जुलाई तक यह पूरे देश को कवर कर लेता है।
भारतीय उपमहाद्वीप से मानसून की विदाई की प्रक्रिया 17 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक पूरी तरह संपन्न हो जाती है। इस बार अल नीनो के प्रभाव के चलते मानसूनी चाल सुस्त हुई है, हालांकि सीजन के अंतिम चरण में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है। आईएमडी के बीते 150 वर्षों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मानसून के केरल पहुंचने का समय बदलता रहा है। साल 1918 में यह सबसे पहले 11 मई को ही पहुंच गया था, जबकि साल 1972 में इसमें सबसे अधिक देरी हुई थी और यह 18 जून को केरल के तट पर उतरा था।