सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की वैश्विक वन्यजीव तस्कर मुरूगेसन की जमानत, थाईलैंड से प्रत्यर्पण के बाद दिल्ली की जेल में है बंद

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की वैश्विक वन्यजीव तस्कर मुरूगेसन की जमानत, थाईलैंड से प्रत्यर्पण के बाद दिल्ली की जेल में है बंद

मध्य प्रदेश वन विभाग और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएएफ) ने कछुओं की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय अपराधी मुनीव्रम मुरूगेसन के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत में मजबूत पैरवी की है। इसके फलस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा-निर्देशों पर प्रदेश में वन्यजीवों की रक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह एक बड़ी सफलता है। आरोपी को थाईलैंड से प्रत्यर्पण की अनुमति मिलने के बाद भारत लाया गया था, जिसे अभी दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुरूगेसन की ओर से दाखिल स्पेशल लीव पिटीशन (विशेष अनुमति याचिका) पर विचार करते हुए कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने मामले की वर्तमान परिस्थितियों, प्रत्यर्पण की स्थिति और पेश किए गए तथ्यों के आधार पर याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। इस मामले में एसटीएएफ ने केंद्रीय एजेंसियों और भारत सरकार के संबंधित विभागों के साथ मिलकर अदालत के समक्ष सभी जरूरी कागजात और अकाट्य तथ्य प्रस्तुत किए, जिससे आरोपी को जमानत नहीं मिल सकी।

पंजीकृत मामलों के अनुसार, आरोपी दुनिया भर में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अवैध व्यापार के बड़े नेटवर्क का संचालन करता था, जिसके चलते इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया था। वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश के वन अमले और एसटीएएफ ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया था। वर्तमान में देश की विभिन्न अदालतों में उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले विचाराधीन हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह रुख अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की कमर तोड़ने में बेहद मददगार साबित होगा। मुख्य आरोपी की कस्टडी और उसके खिलाफ हो रही प्रभावी अदालती कार्रवाई से इस तरह के अपराधों में कमी आएगी। एसटीएएफ इस समय वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि तस्करी के इस पूरे तंत्र को समाप्त किया जा सके। मध्य प्रदेश शासन ने दोहराया है कि पर्यावरण और वन्यजीवों को सुरक्षित रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा वन्यजीव अपराधों में शामिल तत्वों के विरुद्ध आगे भी इसी तरह का कड़ा रुख अपनाया जाएगा।

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