सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर-राज्यीय परिवहन को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-753एल (NH-753L) के बोरगांव-शाहपुर खंड को आधुनिक फोर-लेन कॉरिडोर में बदला जा रहा है। करीब 944 करोड़ रुपये की लागत वाली इस 47 किलोमीटर लंबी परियोजना का 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस नए मार्ग से केला और कपास उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी। यह गलियारा इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के बीच एक सुरक्षित और तीव्र वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरेगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा।
कृषि प्रधान क्षेत्रों और स्थानीय परिवहन को मिलेगी गति यह राजमार्ग मध्यप्रदेश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहाँ प्रतिवर्ष 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। खंडवा और बुरहानपुर जैसे केला उत्पादक केंद्रों से रोजाना लगभग 140 भारी ट्रक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए रवाना होते हैं। अब तक इन ट्रकों को बेहद संकरे और जर्जर रास्तों से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती थी। इस आधुनिक हाईवे के बनने से परिवहन लागत में कमी आएगी और कृषि उत्पाद कम समय में बाजार तक पहुँच सकेंगे।
बुरहानपुर जिले की झीरी पंचायत की सरपंच आशा कैथवास ने पुरानी सड़कों की स्थिति पर बात करते हुए बताया कि पहले गड्ढों और खराब रास्तों की वजह से भारी वाहनों का संचालन एक बड़ी चुनौती था। नए राजमार्ग के निर्माण से ट्रकों की आवाजाही बेहद आसान हो गई है, जिससे किसानों और ट्रांसपोर्टरों को अपनी फसलें मंडियों तक ले जाने में बड़ी सहूलियत मिल रही है।
बुनियादी ढांचे का आधुनिक स्वरूप और मुख्य विशेषताएं स्थानीय आबादी और ग्रामीण संपर्क को बिना किसी बाधा के बनाए रखने के लिए इस परियोजना में कई छोटी-बड़ी संरचनाओं का निर्माण किया गया है।
- परियोजना की अनुमानित लागत: 944 करोड़ रुपये
- कुल लंबाई: लगभग 47 किलोमीटर (85% कार्य पूर्ण)
- मुख्य संपर्क मार्ग: इंदौर – खंडवा – बुरहानपुर – जलगांव – छत्रपति संभाजीनगर
- ढांचागत निर्माण: 1 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया और 14 अंडरपास (LVUP, SVUP और VUP) शामिल हैं।
- बाईपास और सर्विस रोड: शहरों में जाम और प्रदूषण को रोकने के लिए 26 किलोमीटर लंबा बाईपास और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जा रही है।
दो राज्यों के व्यापारिक और सामाजिक संबंधों को मिलेगी मजबूती शाहपुर और बुरहानपुर क्षेत्र के एक कोल्ड स्टोरेज संचालक गोपाल कडुतेमकर ने बताया कि यहाँ से महाराष्ट्र सीमा महज 10 किलोमीटर और जलगांव लगभग 90 किलोमीटर दूर है। इस परियोजना के पूरा होने से इंदौर और मालवा क्षेत्र का फासला बेहद कम महसूस होगा। इससे स्थानीय व्यापार, आपातकालीन सेवाओं और दैनिक यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
वर्तमान में इंदौर से छत्रपति संभाजीनगर के बीच का यातायात पारंपरिक मार्गों पर निर्भर है, जहाँ अक्सर जाम और संकरी सड़कों का सामना करना पड़ता है। बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक के इस पूरे कॉरिडोर के विकसित होने से माल ढुलाई सुरक्षित और तेज होगी। स्थानीय निवासियों के लिए यह हाईवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों को करीब लाने का एक सशक्त जरिया साबित होने जा रहा है।