मध्य प्रदेश में ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ बनी बच्चों का सुरक्षा कवच, डॉ. मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में रिकॉर्ड बच्चों को मिली मदद

मध्य प्रदेश में ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ बनी बच्चों का सुरक्षा कवच, डॉ. मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में रिकॉर्ड बच्चों को मिली मदद

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगभग ढाई वर्ष के शासनकाल के दौरान महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में संवेदनशीलता और सुशासन के नए मानक तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘मिशन वात्सल्य’ योजना के तहत संचालित ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ चौबीसों घंटे सक्रिय भूमिका निभा रही है। यह हेल्पलाइन राज्य के संकटग्रस्त, शोषित और बेसहारा बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत तंत्र के रूप में उभरी है। इसके माध्यम से प्रदेश के हजारों बच्चों को हिंसा, बाल श्रम और मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्याओं से मुक्त कराकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उन्हें सुरक्षित माहौल मिल सके।

इस हेल्पलाइन के नेटवर्क और प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) में काफी सुधार देखा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस हेल्पलाइन के जरिए रिकॉर्ड 30 हजार 810 संकटग्रस्त बच्चों को सहायता प्रदान की गई। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी हेल्पलाइन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं, जिसके तहत 15 मई तक ही 4 हजार 376 बच्चों तक त्वरित मदद पहुंचाई जा चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक 2 हजार 367 मामलों का पूरी तरह समाधान किया जा चुका है और बाकी बचे मामलों में जिला स्तर पर लगातार अनुवर्ती कार्रवाई (फॉलो-अप) की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इस हेल्पलाइन को और अधिक आधुनिक तथा त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली से जोड़ा गया है। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को उनकी गंभीरता के आधार पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। यदि कोई बच्चा किसी तत्काल या गंभीर खतरे में होता है, तो मामले को तुरंत ‘रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम’ (आरएसएस-112) को भेज दिया जाता है, ताकि गृह विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू कर सके। इसके विपरीत, सामान्य या गैर-आपातकालीन मामलों को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को सौंप दिया जाता है।

यह हेल्पलाइन बच्चों को केवल संकट से बाहर ही नहीं निकालती, बल्कि उनके सर्वांगीण संरक्षण का कार्य भी करती है। इसमें बच्चों को प्रताड़ना से बचाना, उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना, मानसिक और सामाजिक परामर्श देना, बाल श्रम से आजादी दिलाना और गुमशुदा बच्चों को वापस उनके परिजनों से मिलाना शामिल है। मानव तस्करी और बेघर होने का दंश झेल रहे बच्चों के लिए यह व्यवस्था एक नई शुरुआत साबित हो रही है।

भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और सतना जैसे बड़े जिलों में इस हेल्पलाइन का नेटवर्क सर्वाधिक सक्रिय रहा है, जहां बड़ी संख्या में बच्चों का रेस्क्यू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, सरकार का उद्देश्य मात्र आपातकालीन सहायता देना नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने राज्य के सभी नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और ग्रामीणों से बच्चों के प्रति अपने सामाजिक दायित्वों को निभाने का अनुरोध किया है। विभाग ने अपील की है कि यदि प्रदेश के किसी भी हिस्से में कोई बच्चा संकट में हो, बाल विवाह अथवा बाल श्रम का शिकार हो, या किसी भी रूप में प्रताड़ित हो रहा हो, तो उसकी सूचना तुरंत ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ पर दें, ताकि समय रहते हर बच्चे का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

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