पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान, विपक्ष के दावों को बताया भ्रामक

पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान, विपक्ष के दावों को बताया भ्रामक

नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन की कीमतों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के कारण पेट्रोल की कीमतों में वास्तविक वृद्धि केवल 7.60 रुपये ही हुई है, जबकि बाकी 10 रुपये की बढ़ोतरी को टैक्स कटौती के जरिए नियंत्रित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस सिलेंडरों के दामों में हुई 29 रुपये की वृद्धि पर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को भी खारिज किया।

एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों का गणित समझाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों में 29 रुपये की बढ़ोतरी को लेकर भ्रामक दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उज्ज्वला योजना का लाभ लेने वाले परिवार औसतन तीन महीने में एक सिलेंडर का उपभोग करते हैं। इस लिहाज से 29 रुपये की इस वृद्धि को अगर तीन महीनों में बांटा जाए, तो यह मासिक रूप से करीब साढ़े नौ रुपये बैठती है। इसे रोजाना के खर्च के हिसाब से देखा जाए तो प्रति दिन महज 30 पैसे का अंतर आता है। देश में इस समय कुल 10 करोड़ 55 लाख उज्ज्वला लाभार्थी हैं।

सब्सिडी के नियमों में बदलाव की वजह बताते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार को पुख्ता जानकारी मिली थी कि कुछ लाभार्थी कोटे से ज्यादा सिलेंडर लेकर उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे थे या उन्हें अवैध रूप से डायवर्ट कर रहे थे। इसी कालाबाजारी को रोकने के लिए रियायती सिलेंडरों की संख्या सीमित की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है, जिसके तहत सिलेंडर खरीदने के बाद सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में जमा होती है। वर्तमान में चार सिलेंडरों तक यह सब्सिडी दी जा रही है। यदि किसी परिवार को त्योहारों या अन्य मौकों पर पांचवें सिलेंडर की आवश्यकता होती है, तो वे इसे बिना सब्सिडी के 300 रुपये अतिरिक्त देकर खरीद सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सामान्य सिलेंडरों पर सरकार लगभग 700 रुपये की भारी सब्सिडी दे रही है। यदि यह वित्तीय मदद न दी जाए, तो बाजार में सिलेंडर की कीमत 1600 रुपये तक पहुंच जाएगी, जबकि अभी यह उपभोक्ताओं को 700 से 945 रुपये के बीच मिल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि करदाताओं के पैसे को इस तरह की अनावश्यक सब्सिडी में क्यों बर्बाद किया जाना चाहिए? उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौर से शुरू हुई मुफ्त राशन की सुविधा आज भी देश के नागरिकों को मिल रही है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विरोधियों का काम केवल आरोप लगाना रह गया है। उन्होंने पूछा कि क्या प्रतिदिन 30 पैसे का यह मामूली बोझ वाकई इतना बड़ा मुद्दा है? आम जनता की आय, वेतन और कुल जीवनयापन की लागत के अनुपात में यह वृद्धि बिल्कुल नगण्य है। अंत में उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी उथल-पुथल के बावजूद सरकार स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अत्यधिक बढ़ती हैं, तो जनता के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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