केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देश के गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 95,692.31 करोड़ रुपए की अंतरिम राशि जारी कर दी है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
इस नए आवंटन से पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत 30,000 करोड़ रुपए की राशि पहले ही आवंटित की जा चुकी है। इन दोनों आवंटनों को मिलाकर अब कुल वित्तीय सहायता 1.25 लाख करोड़ रुपए से अधिक की हो चुकी है। ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी धनराशि देश की करीब 2.8 लाख ग्राम पंचायतों के पास पहुंचेगी, जिससे प्रत्येक पंचायत स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति दे सकेगी।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गांवों के विकास, श्रमिकों के कल्याण और रोजगार सृजन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आगामी 1 जुलाई से जो नई व्यवस्था प्रभावी होने जा रही है, उसका मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, बाधारहित और श्रमिकों के अनुकूल बनाना है। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से अपील की कि वे विकास परियोजनाओं को समय से पहले ही मंजूरी दे दें, ताकि 1 जुलाई से जमीनी स्तर पर काम तेजी से शुरू हो सके। सरकार का लक्ष्य केवल बजट देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिले और उनके अधिकारों की रक्षा हो।
डिजिटल सुधारों की समीक्षा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश के कई राज्यों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस के जरिए सूचना भेजने की प्रणालियों को बेहतर ढंग से अपनाया है। इसके साथ ही 26 राज्यों ने ‘विकसित भारत-ग्रामीण भारत’ के संकल्प के तहत अपने बजट में जरूरी प्रावधान भी शामिल कर लिए हैं। हालांकि, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्यों को इस प्रशासनिक प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इस संबंध में इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से पत्र भी लिखेंगे। वहीं, उन्होंने मिजोरम, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी करने के त्वरित प्रयासों की सराहना की।
इस अंतरिम बजटीय आवंटन में राज्यों को उनकी आवश्यकता के अनुसार राशि दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 12,221.48 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपए, तमिलनाडु को 7,957.57 करोड़ रुपए, आंध्र प्रदेश को 7,707.21 करोड़ रुपए और राजस्थान को 7,581.87 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त बिहार को 6,715.83 करोड़ रुपए, मध्य प्रदेश को 6,252.03 करोड़ रुपए, कर्नाटक को 5,709.09 करोड़ रुपए और महाराष्ट्र को 4,420.32 करोड़ रुपए का हिस्सा मिला है।
केंद्रशासित प्रदेशों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर को 1,151.02 करोड़ रुपए, लद्दाख को 85.98 करोड़ रुपए और पुडुचेरी को 40.56 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अतिरिक्त, केंद्रीय प्रशासन और सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) के सुचारू संचालन के लिए 1,850.62 करोड़ रुपए का अलग से बजटीय प्रावधान किया गया है। अंत में, केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि विकास कार्यों की रूपरेखा ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के परामर्श से तैयार की जाए और 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत मिलने वाले रोजगार व भुगतान में कोई रुकावट न आए।