कमजोर जेट स्ट्रीम के कारण देश में मानसून की रफ्तार थमी, मध्य भारत में गर्मी की वापसी और उत्तर भारत को बारिश का इंतजार

कमजोर जेट स्ट्रीम के कारण देश में मानसून की रफ्तार थमी, मध्य भारत में गर्मी की वापसी और उत्तर भारत को बारिश का इंतजार

देश के बड़े हिस्से में मानसूनी हवाओं की प्रगति रुकने से उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में भीषण गर्मी का दौर फिर लौट आया है। तेलंगाना के भद्राचलम में पिछले छह दिनों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के ठहरे होने के कारण छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वर्षा की शुरुआत में विलंब हुआ है। हालांकि, राजस्थान के बीकानेर और सीकर जिलों में मंगलवार को प्री-मानसून की बारिश दर्ज की गई, जबकि श्रीगंगानगर और चूरू में धूल भरी आंधी का प्रकोप रहा। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के सीधी, बैतूल, रीवा और सतना में तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रहीं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की हाइड्रोमेट्री टीम के सदस्य डॉ. पंकज कुमार के अनुसार, वायुमंडल में समुद्र से मिलने वाली नमी पर्याप्त है, लेकिन सतह से करीब 15 किलोमीटर ऊपर बहने वाली ‘जेट स्ट्रीम’ हवाओं का स्वरूप असामान्य हो गया है। यह तेज हवाओं का चक्र इस बार अपने सामान्य स्थान से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गया है, जिससे मानसूनी हवाओं की गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने अनुमान जताया है कि इस सप्ताह के अंत तक वर्षा की स्थिति में सुधार हो सकता है; छत्तीसगढ़ में अगले तीन से चार दिनों में और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में एक सप्ताह के भीतर मानसून दस्तक दे सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसूनी तंत्र के कमजोर होने का एक मुख्य कारण अरब सागर में भी हवाओं का अटकना है, जो 8 जून से यथास्थिति में हैं। इसके चलते देश के आंतरिक हिस्सों में पहुंच चुके मानसून को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक वायुदाब (पुश) नहीं मिल पा रहा है। इसी अवरोध के कारण मानसून तेलंगाना से आगे छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की ओर नहीं बढ़ पा रहा है।

हालिया सैटेलाइट चित्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि 14 जून को जहां भारत का एक बड़ा भू-भाग बादलों से घिरा हुआ था, वहीं 15 जून की तस्वीरों में देश के अधिकांश हिस्सों से मानसूनी बादल पूरी तरह नदारद दिखे। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 4 जून से 15 जून के बीच देश में वास्तविक वर्षा मात्र 19.2 मिलीमीटर दर्ज की गई, जो कि इस अवधि की सामान्य वर्षा (53.7 मिमी) की तुलना में 64 प्रतिशत कम है।

इस मानसून व्यवधान के कारण सोमवार को देश के कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। उत्तर प्रदेश का बांदा शहर 43.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। इसके अलावा, राजस्थान के फलोदी में 42.8 डिग्री, मध्य प्रदेश के खजुराहो में 42.6 डिग्री, ओडिशा के बौध में 42.5 डिग्री, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42 डिग्री तथा महाराष्ट्र के वर्धा और बिहार के शेखपुरा में अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

आगामी दो दिनों के पूर्वानुमान के तहत 17 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में वर्षा की संभावना है, जहां बिहार में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। पूर्वोत्तर के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश सहित दक्षिण के तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक में भारी बारिश का अनुमान है। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है।

इसके अगले दिन यानी 18 जून को सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में अति भारी वर्षा की चेतावनी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज आंधी के साथ बारिश जारी रह सकती है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मेघ गर्जन के साथ वर्षा होगी, जबकि दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी मौसमी बदलाव और बारिश की संभावना बनी रहेगी।

विभिन्न राज्यों से प्राप्त क्षेत्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून के 18-19 जून को प्रवेश करने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। फिलहाल भोपाल और ग्वालियर सहित 30 जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट जारी किया गया है। राज्य में 1 से 15 जून के दौरान सामान्य 31.9 मिमी की तुलना में केवल 22.7 मिमी वर्षा हुई है, जो कि 29 प्रतिशत कम है। राजस्थान में मौसम विभाग ने 7 जिलों में ऑरेंज और 19 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। सोमवार को चूरू में आए रेतीले बवंडर से दिन में ही अंधेरा छा गया, जबकि दिल्ली में मौसम खराब होने के कारण चार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जयपुर की ओर मोड़ा गया।

बिहार के 24 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जहां 14 जिलों में ऑरेंज और 10 जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। पंजाब के 13 जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ आंधी-बारिश का अलर्ट है, जहां नागरिकों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने का परामर्श दिया गया है। हरियाणा के सभी 22 जिलों में येलो अलर्ट है; भिवानी में 100 मीटर ऊंचा धूल का गुबार देखा गया और हांसी में आंधी के कारण मोबाइल टावर गिरने से एक युवक की जान चली गई। पहाड़ी राज्यों में, हिमाचल प्रदेश में 21 जून तक मौसम खराब रहने और 18-19 जून को शिमला व चंबा सहित 5 जिलों में ओलावृष्टि की आशंका है, जबकि उत्तराखंड के उत्तरकाशी और देहरादून सहित 8 जिलों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

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