डेटा सुरक्षा को राष्ट्र की सीमा जितना महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की ‘सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर’ की घोषणा

डेटा सुरक्षा को राष्ट्र की सीमा जितना महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की ‘सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर’ की घोषणा

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में “राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” पर केंद्रित कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में डेटा सबसे कीमती धरोहर है और इसकी सुरक्षा देश की सीमाओं की रक्षा जितनी ही अनिवार्य हो चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विगत कुछ वर्षों के दौरान न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी डिजिटल तकनीक और उससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है। उन्होंने तकनीक के इस दौर में सायबर सुरक्षा के प्रति निरंतर सतर्क रहने और समय से पूर्व प्रशासनिक व सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री ने बदलते दौर की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साझा सहयोग से राज्य में एक अत्याधुनिक ‘सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर’ स्थापित करने की महत्वपूर्ण घोषणा की। डॉ. यादव ने बताया कि यह नव-प्रस्तावित केंद्र मुख्य रूप से सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा युवाओं के कौशल विकास के क्षेत्र में एक मजबूत मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि यह आधुनिक केंद्र केवल सायबर हमलों के बाद की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए संभावित खतरों की पहले ही पहचान करने में सक्षम होगा।

कार्यक्रम में डिजिटल शासन प्रणालियों और डेटा संरक्षण पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के पश्चात देश में जनधन खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) की एक पारदर्शी व्यवस्था खड़ी की गई है, जिससे हितग्राहियों तक शत-प्रतिशत लाभ सीधे पहुंच रहा है। वैश्विक स्तर पर भारत के यूपीआई सिस्टम की स्वीकार्यता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से सेवाएं मिल रही हैं, तो उनकी डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी बन जाती है। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि नागरिकों की जमा पूंजी को सायबर अपराधियों से सुरक्षित रखना वर्तमान दौर की सबसे बड़ी जरूरत है और डेटा ब्रीच की स्थिति में वित्तीय नुकसान की जवाबदेही भी सरकार की होगी।

इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री एम. सेल्वेन्द्रन ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और नागरिकों को अधिक से अधिक डिजिटल सेवाएं देने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से गठित ‘एमपी-सीईआरटी’ प्रदेश में सायबर खतरों की निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई का काम कर रही है। वहीं, एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक श्री आशीष वशिष्ठ ने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार की 1700 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

कार्यशाला के दौरान सुरक्षा तैयारियों का खाका खींचते हुए एडीजी श्री ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में सायबर अपराधों की रोकथाम के लिए हेल्पलाइन 1930 और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र प्रभावी रूप से काम कर रहा है। उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा तैयारियों के संदर्भ में एक बड़ी योजना साझा करते हुए कहा कि सिंहस्थ से पहले राज्य सायबर सेल में 44 सायबर कमांडो का दस्ता पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा, जिसमें से 6 वर्तमान में कार्यरत हैं और 38 का चयन हो चुका है। इसके अतिरिक्त, सिंहस्थ के दौरान सायबर खतरों और हमलों पर बारीकी से नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग छात्रों और युवा स्वयंसेवकों को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, आईएफएमआईएस नेक्स्ट जेन परियोजना और एनआईसीनेट की सुरक्षा संरचना जैसे गंभीर विषयों पर देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। इसके साथ ही, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) के बीच पांच समानांतर समूहों में लेगेसी प्रणालियों के आ modernisation, जीरो-ट्रस्ट मॉडल, जोखिम आधारित आकलन और विभागीय समन्वय को मजबूत करने जैसे प्रशासनिक व तकनीकी मुद्दों पर व्यापक मंथन किया गया।

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