केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस के नीस और ग्रास शहरों के दौरे के दौरान मोनाको के प्रिंस अल्बर्ट द्वितीय से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच सस्टेनेबिलिटी, नवाचार, ब्लू इकोनॉमी और आधुनिक तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर साझेदारी बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत और मोनाको के रणनीतिक संबंधों को आने वाले समय में एक नए स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई गई। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को अधिक सुदृढ़ बनाने के विविध आयामों पर गहराई से चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री ने नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम के समापन सत्र में हिस्सा लिया। इस तीन दिवसीय आयोजन की सफलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मिली उपलब्धियां भारत और फ्रांस के बीच नवाचार के क्षेत्र में मौजूद विशाल संभावनाओं को उजागर करती हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कुशल मार्गदर्शन में ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ की परिकल्पना ने इस आपसी सहयोग को एक नया और प्रभावी मार्ग दिखाया है।
इस वैश्विक मंच से पीयूष गोयल ने दुनिया भर के प्रमुख निवेशकों, सीईओ, उद्योगपतियों और स्टार्टअप्स को भारत के साथ जुड़ने का खुला निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि एक पर्यावरण-अनुकूल और सतत भविष्य के निर्माण के लिए वैश्विक समुदाय को भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहिए। भारत आज दुनिया के लिए नए व्यावसायिक अवसरों और तकनीकी नवाचारों के एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।
अपनी इस आधिकारिक यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने फ्रांस के प्रसिद्ध ग्रास शहर में स्थित ऐतिहासिक फ्रैगोनार्ड फैक्ट्री का भी अवलोकन किया। उन्होंने वहां के इत्र और सुगंध उद्योग की समृद्ध परंपराओं को समझा और लक्जरी मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइनिंग और हाई-वैल्यू ट्रेड के क्षेत्र में दोनों देशों के मिलकर काम करने की संभावनाओं पर बातचीत की। उनका मानना है कि फ्रांस की उन्नत विशेषज्ञता और भारत की पारंपरिक कला व कुशल कार्यबल के संगम से भारत को प्रीमियम सुगंध क्षेत्र में एक बड़ी वैश्विक ताकत बनाया जा सकता है।
इस दौरे की एक और सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि फ्रांस के नीस शहर में स्थित प्रतिष्ठित ‘गैलरीज लफाएटे नाइस मसीना’ में भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली (UPI) की शुरुआत रही। केंद्रीय मंत्री द्वारा की गई इस पहल को भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम माना जा रहा है।