भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच आगामी 15 जुलाई से व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) पूरी तरह लागू होने जा रहा है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत होगी। बुधवार को साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इसी तारीख से सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (डीसीसी) भी प्रभावी हो जाएगा। इस दोहरे कदम से यूके में कार्यरत भारतीय कामकाजी पेशेवरों को बड़ी राहत मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी व्यावसायिक क्षमता मजबूत होगी।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, डीसीसी के अंतर्गत मिलने वाली रियायत की समय-सीमा को अब तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। इस बदलाव को यूके में सीमित समय के लिए सेवाएं दे रहे भारतीय कर्मचारियों के लिए एक अत्यंत लाभकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस ऐतिहासिक प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यह भारत और यूके के द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक मील का पत्थर है। उन्होंने विश्वास जताया कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों और निवेश प्रवाह को नई ऊंचाइयां देगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में आगे कहा कि इस समझौते के माध्यम से देश के कृषकों, श्रमिकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई), नए स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स के लिए प्रगति के नए द्वार खुलेंगे। इसके साथ ही यह ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने उल्लेख किया कि वे और यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में आई इस तीव्र प्रगति से बेहद उत्साहित हैं।
गौरतलब है कि इस व्यापक व्यापारिक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत मई 2021 में हुई थी, जब दोनों देशों ने मिलकर ‘एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप’ और ‘इंडिया-यूके रोडमैप 2030’ को मंजूरी दी थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आपसी संबंधों को रणनीतिक रूप से सर्वोच्च स्तर पर ले जाना और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े को 100 अरब डॉलर के पार पहुंचाना निर्धारित किया गया था।
इस विषय पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 15 जुलाई 2026 से सीईटीए और डीसीसी के एक साथ प्रभावी होने से भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए असीम संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों (उत्पादों) पर तुरंत सीमा-शुल्क समाप्त होने से पुरानी व्यापारिक बाधाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा उद्योग, समुद्री खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों को वैश्विक मंच पर समान अवसर मिलेंगे, जिससे वे बिना किसी वित्तीय नुकसान के अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्यात कर सकेंगे।
कुल 30 अध्यायों में विस्तृत इस सीईटीए समझौते को आधुनिक काल के व्यापारिक करारों का एक नया प्रतिमान माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर भारत के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को बल देता है। यह करार केवल पारंपरिक आयात-निर्यात शुल्कों में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर सरकारी खरीद, डिजिटल कॉमर्स, टेलीकॉम, वित्तीय सेवाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) जैसे भविष्योन्मुखी विषयों को भी शामिल किया गया है।
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सीईटीए और डीसीसी का यह संयोजन भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक संरचनात्मक बदलाव लाएगा। इसके साथ ही भारतीय हितों का ध्यान रखते हुए इस समझौते में डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई तरह की सब्जियों जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है ताकि घरेलू उत्पादकों को कोई नुकसान न हो।