सरकारी बैंकों ने वित्त मंत्री को सौंपा ₹9,400 करोड़ से अधिक का डिविडेंड, बैंक ऑफ बड़ौदा रहा सबसे आगे

सरकारी बैंकों ने वित्त मंत्री को सौंपा ₹9,400 करोड़ से अधिक का डिविडेंड, बैंक ऑफ बड़ौदा रहा सबसे आगे

नई दिल्ली में सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण को 9,400 करोड़ रुपए से ज्यादा के लाभांश (डिविडेंड) के चेक सौंपे। बैंकों की बेहतर कार्यप्रणाली और मुनाफे में हुई रिकॉर्ड वृद्धि के कारण इस साल सरकार को यह भारी-भरकम लाभांश प्राप्त हुआ है।

इस लाभांश वितरण में बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही, जिसने सरकार को 2,811 करोड़ रुपए का चेक प्रदान किया। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया और बैंक के अन्य कार्यकारी निदेशकों की मौजूदगी में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंध निदेशक (MD) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. देबदत्त चंद ने केंद्रीय मंत्री को यह राशि सौंपी।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस वित्तीय वर्ष में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) इतिहास में पहली बार 20,000 करोड़ रुपए की सीमा को पार करते हुए ₹20,021 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही, 31 मार्च 2026 तक बैंक का कुल वैश्विक कारोबार भी 30 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े के पार दर्ज किया गया। इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर बैंक ने ₹2 अंकित मूल्य वाले प्रति शेयर पर 425 प्रतिशत यानी 8.50 रुपए के डिविडेंड की घोषणा की।

लाभांश सौंपने वाले अन्य प्रमुख बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) भी शामिल रहा, जिसने ₹2,416 करोड़ का चेक सरकार को दिया। यह चेक पीएनबी के एमडी और सीईओ अशोक चंद्र द्वारा वित्त मंत्री को सौंपा गया। इसी क्रम में केनरा बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजेश कुमार सिंह ने भी अपने बैंक की ओर से ₹2,397 करोड़ की लाभांश राशि का चेक केंद्रीय मंत्री सीतारमण को भेंट किया।

इसके अलावा इंडियन बैंक ने भी सरकारी खजाने में ₹1,815 करोड़ के लाभांश का योगदान दिया। बैंक के एमडी और सीईओ बिनोद कुमार ने स्वयं वित्त मंत्री से मुलाकात कर उन्हें यह चेक सौंपा।

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का यह प्रदर्शन उनकी सुधरती वित्तीय सेहत को दर्शाता है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान इन बैंकों ने अपने मुनाफे में बढ़ोतरी, संपत्तियों की गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) में सुधार और बैलेंस शीट को मजबूत करने में सफलता पाई है। चूंकि केंद्र सरकार इन सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे बड़ी शेयरधारक है, इसलिए इस लाभांश का सीधा लाभ सरकारी खजाने को मिला है।

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