हैरी केन के दो गोलों की बदौलत इंग्लैंड की रोमांचक जीत, राउंड ऑफ 16 में मेक्सिको से मुकाबला तय

हैरी केन के दो गोलों की बदौलत इंग्लैंड की रोमांचक जीत, राउंड ऑफ 16 में मेक्सिको से मुकाबला तय

अटलांटा के स्टेडियम में बुधवार को खेले गए फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ‘राउंड ऑफ 32’ मुकाबले में इंग्लैंड ने डीआर कांगो को 2-1 से शिकस्त देकर अगले दौर का टिकट कटा लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के नायक कप्तान हैरी केन रहे, जिन्होंने दो शानदार गोल दागकर अपनी टीम की नॉकआउट चरण में जगह पक्की की। अब 6 जुलाई को मेक्सिको सिटी स्टेडियम में इंग्लैंड का सामना मेजबान मेक्सिको से होगा।

इस नॉकआउट मैच की शुरुआत थॉमस ट्यूशेल के मार्गदर्शन में खेल रही इंग्लैंड की टीम के लिए बेहद निराशाजनक रही। मैच के शुरुआती सातवें मिनट में ही डीआर कांगो ने अप्रत्याशित बढ़त बना ली, जिसके बाद इंग्लैंड पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा था। लंबे समय तक पिछड़ने के बाद, खेल के 75वें मिनट में कप्तान हैरी केन ने पहला गोल कर टीम को बराबरी दिलाई। इसके ठीक 11 मिनट बाद, यानी 86वें मिनट में केन ने मैच का विजयी गोल दागकर अपनी टीम को अंतिम-16 में पहुंचा दिया।

यह मुकाबला इतिहास के पन्नों में भी दर्ज हो गया है, क्योंकि साल 1986 के बाद यह पहला मौका है जब इंग्लैंड की टीम वर्ल्ड कप के किसी मैच में हाफ-टाइम तक एक गोल से पिछड़ने के बाद भी जीत दर्ज करने में सफल रही है। इसके साथ ही ‘थ्री लायंस’ (इंग्लैंड) ने अफ्रीकी देशों के खिलाफ वर्ल्ड कप में अपने अजेय रहने के रिकॉर्ड को बरकरार रखा है। यह इंग्लैंड का अफ्रीकी टीमों के विरुद्ध 10वां मुकाबला था, जिसमें उसने कभी हार का सामना नहीं किया है।

टूर्नामेंट में जर्मनी और नीदरलैंड जैसी मजबूत टीमों के बाहर होने के बाद इंग्लैंड पर भी जल्दी बाहर होने का दबाव साफ दिख रहा था, विशेषकर तब जब खेल का एक घंटा बीत जाने के बाद भी टीम 0-1 से पीछे थी। दूसरे हाफ में इंग्लैंड के फॉरवर्ड लाइन ने लगातार हमले किए, लेकिन कांगो के गोलकीपर लियोनेल मपासी दीवार बनकर खड़े रहे। मपासी के बेहतरीन बचावों की बदौलत कांगो की टीम मैच के अंतिम पलों तक मुकाबले में बनी हुई थी।

अपना पहला वर्ल्ड कप नॉकआउट मैच खेल रही कांगो की टीम ने मैच की आक्रामक शुरुआत की थी। खेल के सातवें मिनट में दाईं तरफ से आए एक क्रॉस-फील्ड पास को चांसल म्बेम्बा ने ब्रायन सिपेंगा की ओर बढ़ाया। सिपेंगा ने बॉक्स के बाईं ओर मिले खाली स्थान का फायदा उठाते हुए एक सटीक लो शॉट लगाया, जिसने इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड को छकाते हुए नेट में जगह बनाई। सिपेंगा का यह पहला अंतरराष्ट्रीय गोल था।

शुरुआती झटके के बाद इंग्लैंड ने मैच में वापसी के लिए काफी संघर्ष किया और कई बड़े मौके बनाए। इस दौरान जूड बेलिंगहम के दो खतरनाक हेडर्स को कांगो के गोलकीपर म्पासी ने मुस्तैदी से रोका। इसके बाद नोनी माडुएके के बेहतरीन मूव पर मार्कस रैशफोर्ड को गोल करने का सुनहरा मौका मिला, लेकिन एरॉन वान-बिसाका ने गेंद को गोल-लाइन से हटाकर इंग्लैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हाफ-टाइम से ठीक पहले म्पासी ने कॉर्नर पर केन की एक बेहद करीबी वॉली का भी शानदार बचाव किया।

मैच के दौरान कांगो के पास अपनी बढ़त को दोगुना करने का भी मौका था। योएन विसा ने वान-बिसाका के एक लो सेंटर पास पर जोरदार शॉट लगाया, जो सीधे पोल से जा टकराया और कांगो ऐतिहासिक बढ़त बनाने से चूक गया। इसके बाद मुख्य कोच थॉमस ट्यूशेल ने अपनी रणनीति बदलते हुए विंगर्स में फेरबदल किया, जो टीम के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

स्थानापन्न (सब्स्टीट्यूट) खिलाड़ी के रूप में मैदान पर आए एंथनी गॉर्डन ने बॉक्स में हैरी केन की तरफ एक सटीक क्रॉस डाला, जिसे केन ने हेडर के जरिए गोल में बदल दिया। इसके बाद 86वें मिनट में केन ने विपक्षी डिफेंडरों को चकमा देते हुए नियर पोस्ट के अंदर एक ऐसा अचूक शॉट मारा, जिसे रोकना कांगो के गोलकीपर के लिए असंभव था। इन दो गोलों की मदद से इंग्लैंड ने अंतिम-16 में अपनी जगह सुरक्षित की।

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