भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सिक्किम के गंगटोक और पाकयोंग जिलों सहित राष्ट्रीय राजमार्ग-310 (एनएच-310) पर स्थित देउराली बाजार से नाथू ला दर्रे तक किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। मई 2026 में आयोजित इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) की वॉयस और डेटा सेवाओं की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना था। इस कदम से उपभोक्ताओं को नेटवर्क के प्रदर्शन की सटीक जानकारी मिलेगी और कंपनियों को अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
नियामक संस्था के अनुसार, इस ड्राइव टेस्ट के तहत 2जी, 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क पर काम करने वाली सभी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के सिम कार्ड का उपयोग किया गया। इस दौरान नेटवर्क की कवरेज, कॉल ड्रॉप की दर, कॉल सेटअप की सफलता दर, कॉल सेटअप में लगने वाला समय, डेटा डाउनलोड और अपलोड की गति, लेटेंसी, जिटर और पैकेट ड्रॉप जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर वॉयस और डेटा सेवाओं को परखा गया।
कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय की देखरेख में ट्राई द्वारा नियुक्त एजेंसी ने 8 और 9 मई 2026 को इस कार्य को अंजाम दिया। इसके तहत गंगटोक और पाकयोंग जिलों के 102.8 किलोमीटर शहरी क्षेत्र, 66.5 किलोमीटर लंबे राजमार्ग और पांच प्रमुख हॉटस्पॉट स्थानों को मिलाकर कुल 174 किलोमीटर से अधिक के दायरे में नेटवर्क की जांच की गई। इस रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े परीक्षण के दौरान संबंधित रास्तों और क्षेत्रों में कंपनियों के वास्तविक प्रदर्शन को रेखांकित करते हैं।
इस विस्तृत मूल्यांकन में शहरों और राजमार्गों पर संचालित एयरटेल, बीएसएनएल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया के नेटवर्क की सिग्नल गुणवत्ता, कवरेज में कमी और कॉल ड्रॉप की स्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया गया। जांच के दौरान अलग-अलग सेवा प्रदाताओं के नेटवर्क कवरेज और कॉल ड्रॉप के स्तर में स्पष्ट अंतर देखा गया। इसके साथ ही, नेटवर्क में आने वाली कॉल साइलेंस (कॉल के दौरान आवाज गायब होना) की घटनाओं का भी एक डेटा तैयार किया गया है।
डेटा स्पीड के मोर्चे पर रिलायंस जियो और एयरटेल का प्रदर्शन अन्य कंपनियों से बेहतर रहा। शहरी क्षेत्रों में डाउनलोडिंग के मामले में रिलायंस जियो ने 63.89 एमबीपीएस और एयरटेल ने 50.93 एमबीपीएस की औसत गति दर्ज की। वहीं, राजमार्ग वाले रूट पर जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 60.26 एमबीपीएस और एयरटेल की 41.60 एमबीपीएस पाई गई। अपलोड स्पीड की बात करें तो शहरों में रिलायंस जियो 13.80 एमबीपीएस और एयरटेल 13.29 एमबीपीएस के साथ शीर्ष पर रहे, जबकि राजमार्ग पर दोनों ही कंपनियों की औसत अपलोड गति लगभग 7.5 एमबीपीएस के आसपास सिमट गई।
नेटवर्क की इस जांच के लिए सिटी ड्राइव टेस्ट के तहत गंगटोक, रानीपूल, पाकयोंग, रोराथांग, कुमरेक, रंगपो, मजीतार, सिंगताम और मांगथांग जैसे शहरी इलाकों को चुना गया था। दूसरी ओर, राजमार्ग परीक्षण के लिए देउराली बाजार से शुरू होकर गंगटोक, ताथांगचेन, हनुमान टोक, रोंग्येक, त्सोमगो झील और शेराथांग होते हुए नाथू ला दर्रे तक का मार्ग तय किया गया। इनके अलावा जिला न्यायालय गंगटोक, एसटीएनएम अस्पताल, एसडीएम कार्यालय पाकयोंग, त्सोमगो झील व्यू प्वाइंट और नाथू ला व्यू प्वाइंट जैसे पांच व्यस्त हॉटस्पॉट स्थानों पर भी नेटवर्क की सघन जांच की गई।
ट्राई ने स्पष्ट किया है कि इस ड्राइव टेस्ट से प्राप्त सभी निष्कर्षों और कमियों को संबंधित दूरसंचार कंपनियों के साथ साझा कर दिया गया है, ताकि वे अपने नेटवर्क में सुधार के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा सकें। इस परीक्षण की पूरी और विस्तृत रिपोर्ट आम जनता और कंपनियों के लिए ट्राई की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दी गई है।
सिक्किम में दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता की जांच: ट्राई ने जारी किए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट के परिणाम
मई 2026 में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा सिक्किम के गंगटोक और पाकयोंग जिलों के साथ-साथ एनएच-310 पर देउराली बाजार से नाथू ला दर्रे के मार्ग पर एक स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) आयोजित किया गया, जिसके निष्कर्ष अब सार्वजनिक कर दिए गए हैं। दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता को मापने के लिए किए गए इस टेस्ट का उद्देश्य उपभोक्ताओं को मोबाइल ऑपरेटरों के प्रदर्शन से अवगत कराना है, जिससे टेलीकॉम कंपनियां अपनी कमियों को दूर कर वॉयस और डेटा नेटवर्क को मजबूत कर सकें।
परीक्षण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए ट्राई ने बताया कि इसमें वर्तमान में सक्रिय सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के 2जी, 3जी, 4जी और 5जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया गया था। इस दौरान कई कॉल और डेटा सेशन चलाकर नेटवर्क के विभिन्न मानकों की जांच की गई, जिनमें मुख्य रूप से सिग्नल कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट, कॉल लगने की सफलता और समय, इंटरनेट की डाउनलोड व अपलोड स्पीड के साथ-साथ लेटेंसी, जिटर और पैकेट ड्रॉप जैसी तकनीकी बारीकियां शामिल थीं।
नेटवर्क की यह पड़ताल ट्राई के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय के दिशा-निर्देशों के तहत 8 और 9 मई 2026 को पूरी की गई। इसके लिए निर्धारित एजेंसी ने गंगटोक और पाकयोंग जिलों के कुल 174 किलोमीटर से ज्यादा लंबे मार्ग को कवर किया, जिसमें 102.8 किलोमीटर का शहरी क्षेत्र, 66.5 किलोमीटर का हाईवे और पांच विशिष्ट हॉटस्पॉट केंद्र शामिल थे। इस आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े सीधे तौर पर उन रूटों पर कंपनियों की नेटवर्क क्षमता की वास्तविक स्थिति को बयां करते हैं।
मूल्यांकन के दौरान एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, रिलायंस जियो और सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल के नेटवर्क सिग्नल की मजबूती और कवरेज के अभाव वाले क्षेत्रों की पहचान की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग ऑपरेटरों के नेटवर्क प्रदर्शन, सिग्नल की उपलब्धता और कॉल ड्रॉप की दरों में काफी विसंगतियां और उतार-चढ़ाव दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त, कॉल के दौरान पैदा होने वाले मूक अंतराल (कॉल साइलेंस) की समस्याओं को भी इस रिपोर्ट में दर्ज किया गया है।
इंटरनेट की गति के आंकड़ों को देखें तो शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में जियो और एयरटेल का दबदबा देखने को मिला। शहरों के भीतर रिलायंस जियो ने 63.89 एमबीपीएस और एयरटेल ने 50.93 एमबीपीएस की औसत डाउनलोड रफ्तार हासिल की। राजमार्गों पर यह आंकड़ा जियो के लिए 60.26 एमबीपीएस और एयरटेल के लिए 41.60 एमबीपीएस रहा। वहीं, अपलोडिंग के मामले में शहरों में जियो ने 13.80 एमबीपीएस और एयरटेल ने 13.29 एमबीपीएस की गति दर्ज कराई, जबकि हाईवे पर इन दोनों की औसत अपलोड स्पीड समान रूप से करीब 7.5 एमबीपीएस रही।
इस व्यापक नेटवर्क ऑडिट के दायरे में गंगटोक, रानीपूल, पाकयोंग, रोराथांग, कुमरेक, रंगपो, मजीतार, सिंगताम और मांगथांग जैसे शहरी केंद्रों को शामिल किया गया था। वहीं, हाईवे टेस्ट के लिए देउराली बाजार (गंगटोक), ताथांगचेन, हनुमान टोक, रोंग्येक, त्सोमगो झील और शेराथांग के रास्ते नाथू ला दर्रे तक का पूरा रूट खंगाला गया। इसके साथ ही गंगटोक जिला न्यायालय, एसटीएनएम अस्पताल, पाकयोंग एसडीएम कार्यालय, त्सोमगो झील व्यू प्वाइंट और नाथू ला व्यू प्वाइंट जैसे पांच चिन्हित हॉटस्पॉट पर भी विशेष रूप से सिग्नलों की जांच की गई।
नियामक निकाय ट्राई ने कहा है कि उन्होंने इस ड्राइव टेस्ट से संबंधित अपनी रिपोर्ट और महत्वपूर्ण निष्कर्षों को सभी जिम्मेदार दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सौंप दिया है, जिससे वे चिन्हित किए गए क्षेत्रों में अपनी तकनीकी कमियों को सुधार सकें। उपभोक्ता और कंपनियां इस पूरी रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन करने के लिए ट्राई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसे देख सकते हैं।