संसद के मानसून सत्र के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे व्यवधान के बजाय तर्क और तथ्यों के आधार पर बहस को दिशा दें। सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संयम और ठोस तर्कों के बल पर किसी भी मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।
देश में जारी आर्थिक और सामाजिक विकास का संदर्भ देते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि संसद की रचनात्मक भावना भारत की प्रगति को अतिरिक्त शक्ति प्रदान करेगी। राष्ट्रीय हितों और जनकल्याण के उद्देश्यों को गति देने के लिए विधायी व्यवस्था के भीतर एक स्वस्थ और सकारात्मक परिवेश का होना अत्यंत आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने दलगत सीमाओं से परे हटकर वरिष्ठ सांसदों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के पास अनुभवी नेताओं की लंबी श्रृंखला है, जिनकी दूरदर्शिता का लाभ संसद और देश दोनों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद का निर्वाध रूप से चलना और देश को आगे ले जाने का सामूहिक संकल्प ही इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।
भारत के युवाओं की सोच का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवा वर्ग निरंतर आगे बढ़ने का आकांक्षी है। ऐसे में राष्ट्रनिष्ठा से भरे विचारों को सदन में उचित मंच मिलना चाहिए ताकि वे देश को सही दिशा प्रदान कर सकें। उन्होंने कहा कि जहां तर्क मजबूत हों, वहां शांतिपूर्ण ढंग से भी बात को वजनदार बनाया जा सकता है।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी दलों के सांसदों से विधायी कार्यों में बढ़-चढ़कर शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने प्रातः काल लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर सांसदों का अभिनंदन करने के संदेश का समर्थन करते हुए सत्र के सफलतापूर्वक संपन्न होने की आशा जताई।