होर्मुज स्ट्रेट में तनाव: अमेरिका ने ईरान पर शुरू किया नया सैन्य हमला, आईआरजीसी का जॉर्डन व कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर पलटावार

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव: अमेरिका ने ईरान पर शुरू किया नया सैन्य हमला, आईआरजीसी का जॉर्डन व कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर पलटावार

अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक बार फिर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की कि राष्ट्रपति (कमांडर इन चीफ) के आदेश पर मंगलवार शाम 4 बजे से ईरान पर हमलों का नया चरण प्रारंभ कर दिया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरानी सैन्य क्षमता को पूरी तरह से निष्प्रभावी करना है।

इस ताजा कार्रवाई से पहले सेंटकॉम ने जानकारी दी थी कि अरब सागर में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना पूरी तरह से तैनात और मुस्तैद हैं। अमेरिकी बलों का लक्ष्य ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी को प्रभावी ढंग से लागू करना और उसके बंदरगाहों से होने वाले समुद्री आवागमन पर सख्त पाबंदी लगाना है। इस दौरान युद्धपोत यूएसएस बॉक्सर (एलएचडी-4) से लगातार हवाई अभियानों का संचालन किया जा रहा है। 20 जुलाई तक अमेरिकी बलों ने ईरान जाने वाले सात वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदल दिया, जबकि एक अन्य जहाज को परिचालन से बाहर कर दिया गया।

दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। आईआरजीसी के अनुसार, सोमवार को जॉर्डन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। ईरानी बल इसे अमेरिका की ओर से लगातार किए जा रहे हमलों की प्रतिक्रिया बता रहे हैं।

आईआरजीसी के बयान के अनुसार, जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह पर स्थित हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जहां अमेरिकी बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर III और पी-8 पोसाइडन विमान मौजूद थे। इसके अतिरिक्त, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर हुए ड्रोन हमले में अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गया तथा एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के हैंगर सहित कई सैन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।

वहीं, सेंटकॉम ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना ने लगातार नौवें दिन ईरान पर रणनीतिक हमले जारी रखे। इन सुनियोजित हमलों में ईरानी सैन्य कमान केंद्रों, वायु रक्षा प्रणालियों, तटीय निगरानी ठिकानों, मिसाइल-ड्रोन प्रक्षेपण स्थलों और संचार नेटवर्क को भारी क्षति पहुंचाई गई है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच जारी यह सैन्य टकराव बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य मुख्य संघर्ष क्षेत्र बना हुआ है।

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