केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मंगलवार को मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की उपस्थिति में 175.45 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘मिशन गोल्डन स्पाइस–एकीकृत लकाडोंग हल्दी मूल्य श्रृंखला संवर्धन परियोजना’ की शुरुआत की। वर्ष 2025 से 2030 तक पाँच वर्षों की अवधि में संचालित होने वाले इस महत्वाकांक्षी मिशन का मुख्य उद्देश्य जीआई-टैग प्राप्त मेघालय की लकाडोंग हल्दी को दुनिया भर में एक प्रीमियम स्पाइस ब्रांड के रूप में स्थापित करना और स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि करना है।
इस योजना को दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा। शुरुआती चरण में हल्दी की वैल्यू चेन को सुदृढ़ किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण के अंतर्गत इसके कुल उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमताओं का विस्तार होगा। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के दिशा-निर्देशन में यह पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, एपीडा, मसाला बोर्ड, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, आईसीएआर, नाबार्ड, एसएफएसी तथा मेघालय सरकार के संयुक्त सहयोग से पूरी की जाएगी।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने जानकारी दी कि लकाडोंग हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा 7 से 10 प्रतिशत तक पाई जाती है, जो कि वैश्विक औसत की तुलना में काफी ज्यादा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं, आधारभूत ढांचे, ब्रांडिंग और समुचित बाजार संपर्क के अभाव के कारण किसानों को अब तक उनकी उपज का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा था। यह मिशन इन संरचनात्मक कमियों को दूर कर घरेलू एवं विश्व स्तर पर इसकी पहुंच को आसान बनाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट’ और ‘अष्टलक्ष्मी’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने रेखांकित किया कि लकाडोंग हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन का स्तर विश्व के औसत से करीब चार गुना अधिक है और इसकी खेती में महिला कृषकों का प्रमुख योगदान है। इस मिशन के माध्यम से किसानों को मिलने वाले भाव को 30-40 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक लगभग 80 रुपये प्रति किलो करने और इसकी खेती का दायरा 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
सिंधिया ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेघालय की इस विशेष हल्दी का उल्लेख किया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रति आकर्षण बढ़ा है। उन्होंने इस अभियान से जुड़े सभी निकायों से अपील की कि वे उत्पाद की गुणवत्ता, प्रामाणिकता, टिकाऊपन और उत्पादन क्षमता पर विशेष ध्यान दें, ताकि वैश्विक बाजार में यह अपनी विशिष्ट जगह बना सके।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इसे एक दूरगामी कदम बताते हुए कहा कि यह मिशन वर्षों के संस्थागत प्रयासों का परिणाम है और पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य के अद्वितीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की केंद्रीय रणनीति के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि मेघालय की भौगोलिक सीमा से बाहर उगाने पर इस हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा घटने लगती है, जो इसकी मौलिकता को दर्शाती है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में अनानास, अदरक, कटहल, शहद और मशरूम जैसे अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए भी इसी प्रकार का मॉडल अपनाया जाएगा।
मेघालय के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि लकाडोंग हल्दी महज एक फसल न होकर राज्य की सांस्कृतिक और कृषि पहचान से जुड़ी है। मिशन के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऑर्गेनिक हल्दी की सबसे बड़ी एकीकृत प्रसंस्करण एवं करक्यूमिन निष्कर्षण इकाई स्थापित की जाएगी। इसके अलावा, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और व्यावसायिक उद्यमों के माध्यम से महिलाओं को केंद्रीय भूमिका में रखकर पूरी मूल्य श्रृंखला को और मजबूत किया जाएगा।