देश में 10 हजार किमी से अधिक एक्सप्रेसवे परियोजनाएं मंजूर, 4,809 किमी का निर्माण पूरा: संसद में सरकार जानकारी दी

देश में 10 हजार किमी से अधिक एक्सप्रेसवे परियोजनाएं मंजूर, 4,809 किमी का निर्माण पूरा: संसद में सरकार जानकारी दी

केंद्र सरकार ने उच्च गति वाले सड़क नेटवर्क के विस्तार को लेकर संसद में महत्वपूर्ण विवरण पेश किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश भर में अब तक कुल 10,389 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कार्यों को मंजूरी देकर उन्हें आवंटित कर दिया गया है। इन स्वीकृत परियोजनाओं में से 4,809 किलोमीटर मार्ग का बुनियादी ढांचा पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, जबकि शेष 5,580 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण का काम अभी प्रगति पर है।

उच्च सदन राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस ढांचागत विकास का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्गों की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय समीक्षा प्रणाली बनाई गई है। इसके तहत परियोजना, राज्य और केंद्रीय स्तर पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है और संबंधित राज्य सरकारों सहित सभी अंशधारकों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है।

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में सबसे बड़े हाई-स्पीड नेटवर्क को स्वीकृति मिली है। राज्य के हिस्से में 1,340 किलोमीटर की परियोजनाएं आई हैं, जिनमें से 1,192 किलोमीटर का काम पूरा कर लिया गया है और केवल 148 किलोमीटर का हिस्सा ही निर्माणाधीन है। इसके विपरीत, पंजाब को 923 किलोमीटर की परियोजनाएं मिली हैं, जहां बड़े पैमाने पर 774 किलोमीटर का निर्माण कार्य वर्तमान में चल रहा है।

अन्य प्रमुख राज्यों में भी ढांचागत विकास में गति देखी जा रही है। आंध्र प्रदेश में कुल स्वीकृत 893 किलोमीटर में से 308 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 585 किलोमीटर पर काम जारी है। इसी प्रकार, उत्तर प्रदेश में आवंटित 884 किलोमीटर में से 388 किलोमीटर का मार्ग बन चुका है और 496 किलोमीटर पर निर्माण जारी है। हरियाणा के लिए मंजूर 839 किलोमीटर में से 615 किलोमीटर और गुजरात के 764 किलोमीटर के नेटवर्क में से 605 किलोमीटर का काम पूरा किया जा चुका है।

सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आने वाली प्रशासनिक और तकनीकी देरी को समाप्त करने के लिए कई डिजिटल पहल की गई हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने हेतु ‘भूमि राशि’ पोर्टल के साथ जीआईएस तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसके साथ ही, पर्यावरण और वन से जुड़ी स्वीकृतियों में तेजी लाने के लिए ‘परिवेश’ पोर्टल को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है।

रेलवे लाइनों पर सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रेलवे के साथ मिलकर ऑनलाइन स्वीकृति प्रणाली लागू की गई है। इसके अंतर्गत रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) के जनरल अरेंजमेंट ड्रॉइंग (जीएडी) को डिजिटल माध्यम से तुरंत मंजूरी दी जा रही है। विभिन्न एजेंसियों और राज्य सरकारों के साथ नियमित संवाद के कारण आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के निष्पादन की गति में भारी सुधार दर्ज किया गया है।

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