वैश्विक चुनौतियों के मध्य भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति जारी: भारतीय रिजर्व बैंक

वैश्विक चुनौतियों के मध्य भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति जारी: भारतीय रिजर्व बैंक

वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत गति बनाए हुए है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी जुलाई के मासिक बुलेटिन के अनुसार, जून माह तक देश के भीतर आर्थिक गतिविधियां काफी तेज रही हैं। इस मजबूती के बल पर भारत विश्व की सबसे तेजी से उभरती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना हुआ है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि घरेलू मांग के मजबूत आधार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहे दबावों को बेअसर करने में अहम भूमिका निभाई है।

आरबीआई की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि देश का औद्योगिक और सेवा क्षेत्र लगातार मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है। विदेशी व्यापार के मोर्चे पर भी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के दौरान आयात और निर्यात दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) सहित अन्य द्विपक्षीय व्यापारिक करारों से आने वाले समय में वाणिज्यिक गतिविधियों को और अधिक गति मिलने की संभावना व्यक्त की गई है।

देश में विदेशी निवेश की स्थिति में भी सुधार के स्पष्ट संकेत मिले हैं। आंकड़े दर्शाते हैं कि अप्रैल और मई के महीनों में सकल एवं शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर रहा है। वहीं दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह भी जून महीने में सकारात्मक दिशा में लौट आया।

महंगाई और बैंकिंग क्षेत्र के संदर्भ में बुलेटिन में उल्लेख किया गया है कि जून में खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि अवश्य देखी गई, परंतु मुख्य मुद्रास्फीति का स्तर निचला बना रहा। देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार मौजूद होने के कारण खाद्य महंगाई का प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, बाजार में नकदी की सुगम उपलब्धता से बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋणों की वृद्धि दर को भी मजबूत सहारा मिला है।

वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए केंद्रीय बैंक ने सचेत किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, भू-राजनीतिक खिंचाव और व्यापारिक संबंधों में बिखराव जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। हालांकि, इन कठिन परिस्थितियों के विपरीत भारत की मजबूत आंतरिक अर्थव्यवस्था इनसे सफलतापूर्वक मुकाबला करने में सक्षम रही है। रिपोर्ट के अंत में यह स्पष्ट किया गया कि मार्च 2026 के अंत तक भारत से संबंधित प्रमुख बाहरी जोखिम संकेतक पूरी तरह से संतुलित और सुदृढ़ स्थिति में दर्ज किए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *