प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत देश भर से आए युवा प्रतिभागियों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों और पर्यटकों से विशेष आग्रह किया कि वे अपनी यात्रा के कुल बजट का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादों की खरीदारी पर जरूर खर्च करें। पीएम मोदी ने कहा कि इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को भी देश भर में विस्तार मिलेगा।
लगभग 250 जिलों का प्रतिनिधित्व कर रहे युवाओं का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस पहल के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण की भावना को बढ़ावा देने की सराहना की। बातचीत के दौरान जौनपुर से जुड़े प्रतिभागियों से उनके खरीदारी के अनुभव के बारे में पूछने पर युवाओं ने बताया कि उन्होंने व्यापक स्तर पर खरीदारी की और डिजिटल भुगतान का उपयोग किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने ‘मेरा युवा भारत (माय भारत)’ मंच की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि करोड़ों युवाओं का इससे जुड़ना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में 3 लाख आवेदकों में से 400 से अधिक युवाओं को चयनित कर भेजा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को जमीनी स्तर पर देश की वास्तविकताओं, स्थानीय संस्कृति और देशभक्ति की भावना से सीधे जोड़ना था। उन्होंने इसे ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया।
सीमावर्ती क्षेत्रों से अपने पुराने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने वहां तैनात सैनिकों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा और कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर जवानों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों का देशप्रेम कभी कम नहीं हुआ।
अतीत में इन क्षेत्रों की प्रशासनिक अनदेखी पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पहले जिन्हें ‘आखिरी गांव’ मानकर मूलभूत सुविधाओं से वंचित छोड़ दिया गया था, अब ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के माध्यम से वहां विकास, शिक्षा और रोजगार का नया वातावरण बन रहा है। उन्होंने युवाओं से सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने और अपने अनुभवों को कम से कम 100 अन्य साथियों के साथ साझा करने की अपील की।