अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों के टलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई। इसके प्रभाव से सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ हरे निशान पर बंद हुआ। बीते लगातार पांच सत्रों की गिरावट पर विराम लगाते हुए देश के दोनों प्रमुख मानक सूचकांक – सेंसेक्स और निफ्टी 50 – लगभग एक प्रतिशत तक की उछाल दर्ज करने में सफल रहे।
कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 776.01 अंक (1.02 प्रतिशत) की बढ़त लेकर 76,835.78 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 228.50 अंक (0.96 प्रतिशत) की तेजी के साथ 23,995.95 के अंक पर पहुंच गया।
व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 1.11 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 में 1.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। क्षेत्रीय मोर्चे पर सभी सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। मीडिया क्षेत्र 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि आईटी इंडेक्स 2.3 प्रतिशत की मजबूती के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा रियल्टी में 2.2 प्रतिशत, ऑटो में 1.6 प्रतिशत और फार्मा में 1.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
अन्य सूचकांकों में एफएमसीजी 1 प्रतिशत, बैंक 0.7 प्रतिशत, इंफ्रा 0.66 प्रतिशत, मेटल 0.6 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.45 प्रतिशत, प्राइवेट बैंक 0.42 प्रतिशत और पीएसयू बैंक 0.22 प्रतिशत चढ़कर बंद हुए। सेक्टोरल विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि आईटी, मीडिया और रियल्टी ने बाजार को सबसे ज्यादा सहारा दिया, जबकि ऑयल एंड गैस क्षेत्र का प्रदर्शन सुस्त रहा। रियल्टी, फार्मा और मेटल इंडेक्स ने पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को समाप्त किया।
निफ्टी के शीर्ष बढ़त वाले शेयरों में इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, मैक्स हेल्थ और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे। वहीं दूसरी तरफ ओएनजीसी, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, कोल इंडिया, पावर ग्रिड और डॉ रेड्डीज लैब्स के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। बाजार की इस तेजी से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल पूंजीकरण पिछले सत्र के 476 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 481 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
आगामी दिनों में वैश्विक बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति बैठकों पर होगी, जहां केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना जताई जा रही है। वहीं घरेलू स्तर पर मानसूनी बारिश में सुधार से महंगाई घटने के संकेत, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के बेहतर कॉर्पोरेट परिणाम और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बाजार को मजबूती दे रहे हैं।