महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित ‘लोकमान्य तिलक नेशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को मजबूत करने में उनके अप्रतिम योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और लोकमान्य तिलक ट्रस्ट के न्यासी रोहित तिलक सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। देशभक्तिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए इस समारोह के दौरान वक्ताओं ने डोभाल के रणनीतिक कौशल की सराहना की तथा स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रसेवा के आदर्शों को नमन किया।
गौरतलब है कि 81 वर्षीय अजीत डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। अपने व्यापक प्रशासनिक व सुरक्षा करियर के दौरान उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त, इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय दूतावासों में भी उन्होंने अपनी कूटनीतिक सेवाएं दी हैं।
भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए देश के विशेष प्रतिनिधि रह चुके डोभाल को वर्ष 2017 के डोकलाम गतिरोध को कूटनीतिक सूझबूझ से सुलझाने का विशेष श्रेय दिया जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर उनके द्वारा लिए गए ठोस रणनीतिक निर्णयों और आतंकवाद विरोधी सफल अभियानों की पहचान के रूप में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है।
‘लोकमान्य तिलक पुरस्कार’ की स्थापना वर्ष 1983 में महाराष्ट्र मंडल, पुणे द्वारा की गई थी। यह सम्मान प्रतिवर्ष 1 अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्र के विकास, सामाजिक उत्थान और प्रगति में ऐतिहासिक योगदान देने वाली हस्तियों को दिया जाता है। इस पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता प्रसिद्ध समाजवादी नेता एस.एम. जोशी थे। पूर्व में यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और एनसीपी नेता शरद पवार जैसी दिग्गजों को मिल चुका है।