संसदीय सत्र के दौरान शुक्रवार को लोकसभा में उस समय गतिरोध उत्पन्न हो गया, जब विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। 20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर के दान में हुई कथित अनियमितताओं पर गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण की मांग को लेकर विपक्ष अड़ा रहा। इसके चलते अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए रोक दिया।
दिन की शुरुआत में, सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने देश के स्वाधीनता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्याय को याद किया। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि 9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ है। उन्होंने याद दिलाया कि 1942 में इसी दिन महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का ऐतिहासिक संदेश दिया था, जो भारतीय जनता के अदम्य साहस, एकता और अहिंसक संघर्ष का अमर प्रतीक बन गया।
अध्यक्ष ने कहा कि इस आंदोलन ने देशवासियों में स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रति अभूतपूर्व चेतना जगाई और राष्ट्रीय आत्मविश्वास को नई दिशा दी। इस गौरवशाली इतिहास को नमन करते हुए सदन में दो मिनट का मौन धारण किया गया, जिसके बाद विधायी कार्य निपटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ हुआ, विपक्षी सांसदों ने पुनः नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में व्यवस्था बनाते हुए अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विश्व भर में महात्मा गांधी के योगदान को आदर के साथ देखा जाता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि भारतीय लोकतंत्र को अधिक सशक्त बनाने के लिए उन्हें भी गांधी जी के मार्ग पर चलना चाहिए और संसद के भीतर केवल संवाद एवं विचारों की अभिव्यक्ति को माध्यम बनाना चाहिए।
सदन की गरिमा पर जोर देते हुए अध्यक्ष ने बाबासाहेब अंबेडकर का स्मरण कराया और दोहराया कि चर्चा ही लोकतंत्र की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का वर्तमान आचरण स्थापित संसदीय मर्यादाओं के विपरीत है, इसलिए वे शांत होकर प्रश्नकाल के संचालन में सहयोग करें। परंतु, विरोध जारी रहने के कारण उन्हें विवश होकर दोपहर 12 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।