विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले जहाजों और देश के नाविकों की सुरक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों और पोत परिवहन मंत्रालय के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
नाविकों और अन्य भारतीय नागरिकों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय दूतावासों में चौबीसों घंटे चालू रहने वाली विशेष हेल्पलाइन सेवाएं संचालित की जा रही हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से निर्बाध रूप से कार्य कर रही है और आगे भी जारी रहेगी, ताकि किसी भी जरूरत के समय तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक गतिविधियों और समुद्री आवागमन को पूरी तरह सुरक्षित एवं बाधारहित बनाए रखने की बात दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे असैन्य बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों तथा उन पर तैनात चालक दल के सदस्यों को किसी भी तरह से निशाना न बनाएं।
इस बीच, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को संसद में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार के प्रयासों से खाड़ी संकट के दौरान अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। इसके साथ ही, 3 अगस्त तक 23 भारतीय और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाजों सहित कुल 62 वाणिज्यिक पोत होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।
मध्य पूर्व में उपजी सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) द्वारा सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश समय-समय पर अद्यतन किए जा रहे हैं। सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों और नाविकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित 24×7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जो जहाजों और क्रू का लाइव डेटाबेस रखता है। इसके साथ ही हर 24 घंटे में स्थिति का जायजा लेकर अद्यतन रिपोर्ट जारी की जा रही है।