केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को घोषणा की कि बिहार का प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त ‘मिथिला मखाना’ अब ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में अपनी पहुंच बना चुका है। राज्य से पहली बार 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना की खेप समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर मखाने की बढ़ती मांग से बिहार के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को नया आयाम मिल रहा है।
दरभंगा क्षेत्र के किसानों के लिए यह निर्यात अत्यधिक लाभदायक साबित हुआ है। इस परियोजना के तहत उत्पाद की खरीद सीधे दरभंगा के स्थानीय किसानों से की गई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें सामान्य बाजार दरों से लगभग 18 फीसदी अधिक मुनाफा हासिल हुआ। इस प्रत्यक्ष खरीद प्रक्रिया से किसानों की आय में सुधार दर्ज किया गया है और उनके परिश्रम का उचित मूल्य मिला है, जो राज्य के कृषि परिदृश्य के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिथिला मखाना की यह सफलता कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पिछले महीने भी बिहार के मखाना क्षेत्र ने कनाडा को सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना समुद्री मार्ग से भेजकर एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की थी। एपीडा के माध्यम से संचालित उस निर्यात प्रक्रिया में भी किसानों को 50 प्रतिशत से अधिक का बढ़ा हुआ मूल्य मिला था। यह शृंखला दर्शाती है कि बिहार के उत्पाद अब वैश्विक मानकों पर खरे उतर रहे हैं।
विकसित देशों में मखाने की मांग का यह रुझान राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। निर्यात में इस बढ़ोतरी से बिहार में मखाना प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों में निवेश की नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और अवसंरचना का विकास संभव होगा।
मिथिलांचल का यह पारम्परिक उत्पाद अपने न्यूट्रिशनल वैल्यू और बेहतरीन स्वाद के कारण अंतरराष्ट्रीय रेडी-टू-ईट तथा हेल्थ-कॉन्शियस सेगमेंट में अपनी खास जगह बना रहा है। समुद्री मार्ग से बड़े पैमाने पर मखाने का सफल परिवहन भारत की कृषि निर्यात रणनीति के लिए एक बड़ी सफलता है, जो वैश्विक न्यूट्रिशस फूड मार्केट में भारत के बाजार शेयर को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
इस निरंतर सफलता से बिहार के कृषि आधारित अर्थशास्त्र को एक नई गति मिलने का अनुमान है। विश्व बाजार में मिथिला मखाना की मजबूत उपस्थिति से जहां एक ओर किसानों को उनके उत्पाद का टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य में एग्रो-प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सकेगा।