एसटीपीआई की एकल खिड़की व्यवस्था से आईटी क्षेत्र को गति, तीन वर्षों में निर्यात बढ़कर ₹7.73 लाख करोड़ के पार

एसटीपीआई की एकल खिड़की व्यवस्था से आईटी क्षेत्र को गति, तीन वर्षों में निर्यात बढ़कर ₹7.73 लाख करोड़ के पार

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (एसटीपी) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से देश के आईटी निर्यात को नई रफ्तार मिली है। 12 अगस्त 2026 को संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एसटीपी इकाइयों द्वारा 7,73,898.97 करोड़ रुपये का अनुमानित निर्यात किया गया है।

आधिकारिक विवरण के अनुसार, आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं के निर्यात में निरंतर प्रगति दर्ज की जा रही है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2023-24 में जहां 6,36,619.87 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा 6,88,194.11 करोड़ रुपये पर पहुंचा और 2025-26 में इसके 7,73,898.97 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस अवधि में सक्रिय इकाइयों का दायरा भी विस्तृत हुआ है; वर्ष 2023-24 में 2,059 और वर्ष 2024-25 में 2,042 इकाइयों के मुकाबले 2025-26 में कुल एसटीपी इकाइयों की संख्या 2,125 दर्ज की गई। इस वर्ष इन इकाइयों का कुल पूंजी निवेश 7,362.86 करोड़ रुपये तथा आयात 9,960.26 करोड़ रुपये रहने का आकलन है।

राज्यवार भागीदारी के विश्लेषण में कर्नाटक ने अपना वर्चस्व बरकरार रखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक 3,50,184.78 करोड़ रुपये का निर्यात हासिल किया। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र 1,62,594.11 करोड़ रुपये और तेलंगाना 1,13,101.83 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल रहे। इसी प्रकार तमिलनाडु से 60,591.28 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश से 28,442.69 करोड़ रुपये, हरियाणा से 26,885.28 करोड़ रुपये तथा पश्चिम बंगाल से 10,888.26 करोड़ रुपये का निर्यात संपन्न हुआ।

कारोबारी माहौल को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) ने कई नीतिगत और तकनीकी सुधार लागू किए हैं। निर्यातकों के लिए सॉफ्टेक्स फाइलिंग तथा उससे जुड़ी स्वीकृतियों को पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड कर दिया गया है। आंकड़ों के त्वरित आदान-प्रदान के लिए एसटीपीआई प्रणाली को रिजर्व बैंक के निर्यात निगरानी तंत्र (ईडीपीएमएस) के साथ संबद्ध किया गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप में कमी आई है और डेटा सीधे केंद्रीय बैंक तक पहुंच रहा है।

प्रक्रियागत सरलीकरण के अंतर्गत कंपनियों को आयात के लिए अब बार-बार अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि संपूर्ण वित्तीय वर्ष के लिए एकमुश्त ब्लैंकेट परमिशन दी जा रही है। इसके अलावा, घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में बिक्री के संदर्भ में, अग्रिम डीटीए बिक्री के पहले साल को छोड़कर, पूर्व-अनुमोदन की अनिवार्यता हटाकर स्व-घोषणा (सेल्फ-डिक्लेरेशन) की सुविधा दी गई है। यह संपूर्ण पहल देश के सॉफ्टवेयर उद्योग को मजबूती प्रदान करने और कारोबारी सरलता को बढ़ाने के सरकारी संकल्प को दर्शाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *