वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग जैन ने संभाला नीति आयोग के नए सीईओ का पदभार

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग जैन ने संभाला नीति आयोग के नए सीईओ का पदभार

केंद्र सरकार के प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग में सोमवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनुराग जैन ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का दायित्व संभाल लिया। देश के शीर्ष नीति-निर्माण संस्थान में उनकी यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखी जा रही है।

नीति आयोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आधिकारिक संदेश साझा करते हुए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के आगमन का स्वागत किया। मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन के पास शासन, लोक प्रशासन और राष्ट्रीय नीति-निर्माण के क्षेत्र में लगभग चार दशकों का सुदीर्घ अनुभव है। अपने इस लंबे सेवाकाल में उन्होंने केंद्र तथा राज्य सरकार के विभिन्न दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया है।

नीति आयोग में आने से पूर्व वे मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वहीं, केंद्र सरकार में भी उन्होंने कई अहम महकमों का नेतृत्व किया है, जिनमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव का पद प्रमुख रूप से शामिल है।

औद्योगिक नीतियों, बुनियादी ढांचा विकास, आर्थिक समृद्धि और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मामलों में उनकी गहरी समझ को नीति आयोग के लिए अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है। आयोग के सीईओ के रूप में वे केंद्र सरकार की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को गति देने, विभिन्न मंत्रालयों के मध्य समन्वय बढ़ाने और राज्य सरकारों के साथ साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने इस वर्ष की शुरुआत में उनके नाम को स्वीकृति दी थी। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के आधिकारिक आदेश के अनुसार, उनका यह कार्यकाल दो वर्ष अथवा अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल माह में केंद्र सरकार ने जाने-माने अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी को सुमन के. बेरी के स्थान पर नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था।

नीति आयोग देश के दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तैयार करने, आर्थिक सुधारों को दिशा देने और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की निगरानी करने वाली मुख्य संस्था है। ऐसे में अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व के साथ आयोग की रणनीतिक और कार्यान्वयन क्षमता को और अधिक विस्तार मिलने की संभावना है।

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