पूर्वी इंडोनेशियाई क्षेत्र में शनिवार तड़के आए 7.7 तीव्रता के भयंकर भूकंप के बाद चलाए जा रहे राहत कार्यों के बीच रविवार को छह अन्य शव मिलने से मृतकों की कुल संख्या 53 पहुंच गई है। लगातार जारी पश्चावर्ती झटकों (आफ्टरशॉक्स) के खौफ से प्रभावित इलाकों के हजारों बेघर नागरिकों ने खुले मैदानों में रात गुजारी।
फ्लोरेस द्वीप के छह अलग-अलग जिलों में राहत एवं खोज दल भूस्खलन के मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन का सबसे अधिक ध्यान मंगराई, ईस्ट मंगराई और नागेकेओ जैसे सर्वाधिक क्षतिग्रस्त और दूरदराज के इलाकों पर है। मौमेरे खोज एवं बचाव केंद्र के प्रमुख फतहुर रहमान के अनुसार, कई प्रमुख रास्तों से मलबा हटाकर अलग-थलग पड़े गांवों का आवागमन दोबारा बहाल कर दिया गया है, मगर दूरसंचार सेवाओं के बाधित होने और बिजली गुल रहने से राहत कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।
यूएसजीएस के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को स्थानीय समय से सुबह करीब छह बजे 10 किमी की गहराई पर भूकंप का केंद्र था। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अधिकारी अब्दुल मुहारी ने पुष्टि की कि भूकंप के बाद 995 झटके रिकॉर्ड किए गए, जिनमें से 46 झटके महसूस किए जाने योग्य थे। इस हादसे में कुल 135 लोग घायल हुए हैं। पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में 900 से अधिक घर पूरी तरह तबाह हुए हैं तथा 450 घरों को नुकसान पहुंचा है, जिससे करीब 5,000 लोग अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। अकेले फ्लोरेस में कम से कम 241 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
पर्यटन स्थल लाबुआन बाजो में भी लोग डर की वजह से घरों में जाने से बचते दिखे। क्षतिग्रस्त घर के पास अस्थायी तंबू में समय बिता रहीं स्थानीय कृषक अनास्तासिया इमाड ने कहा कि कंपन इतना भयानक था कि मकान ढहने के कगार पर आ गया, और उन्हें इस बात का भय था कि सोते वक्त बचा हुआ ढांचा ढह सकता है। भूस्खलन की वजह से पहाड़ी बस्तियों को जोड़ने वाली 700 किलोमीटर लंबी ट्रांस-फ्लोरेस सड़क के कई हिस्से भी अवरुद्ध हो गए हैं।
प्रशासनिक टीमें विस्थापितों को सूखा राशन, तैयार खाना, स्वच्छ जल, दवाएं व आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ की भौगोलिक पट्टी में 17 हजार से अधिक द्वीपों पर बसे इंडोनेशिया में अक्सर भीषण भूगर्भीय हलचलें होती हैं। फ्लोरेस में 1992 में आए भूकंप व सुनामी में लगभग 2,500 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा 2018 में सुलावेसी में 7.5 तीव्रता के भूकंप में 4,400 से ज्यादा और 2004 में सुमात्रा के पास 9.1 तीव्रता के भूकंप जनित सुनामी में 12 देशों के 2,30,000 नागरिकों की मौत हुई थी।