केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश के बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं, जिसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं।
वित्त मंत्री ‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026’ के उद्घाटन सत्र में सरकारी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों को संबोधित कर रही थीं। दो दिवसीय इस सम्मेलन में बैंकिंग उद्योग से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर मंथन किया जा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में पहली बार वित्तीय सेवा विभाग ने सम्मेलन के लिए चयनित सात मुख्य विषयों पर विस्तृत शोध पत्र तैयार किए हैं। इन दस्तावेजों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली बेहतर कार्यप्रणालियों को शामिल किया गया है। अधिकारियों को ये शोध पत्र पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे, ताकि परिचर्चा केवल विचारों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक और लागू करने योग्य समाधानों में तब्दील हो सके। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन सिफारिशों को धरातल पर उतारने की पूरी जिम्मेदारी बैंकों की ही होगी।
युवाओं पर केंद्रित शोध पत्र का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत की लगभग 29 प्रतिशत आबादी 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में है। इस दस्तावेज में भारतीय युवाओं की जरूरतों को उम्र और जीवन के अलग-अलग चरणों के आधार पर विश्लेषित किया गया है। बैंकों को अपनी भविष्य की योजनाएं और उत्पाद तैयार करते समय इस विशाल युवा वर्ग की वित्तीय प्राथमिकताओं को केंद्र में रखना चाहिए।
एनपीए में आई भारी गिरावट का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों ने संकट के समय बहीखातों को दुरुस्त (बैलेंस शीट क्लीनअप) कर बाजार में अपनी विश्वसनीयता फिर से कायम की है। नतीजतन, बैंक अब रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय एक सशक्त स्थिति से सुधारों को आगे बढ़ाने की स्थिति में हैं।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब ‘विकसित भारत’ के रोडमैप के तहत बैंकिंग क्षेत्र पर एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा होने की उम्मीद है। इस आयोजन से प्राप्त सुझाव उक्त समिति के लिए बैंकिंग क्षेत्र की भावी भूमिका तय करने में अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। सम्मेलन के सात प्रमुख विषयों में जमा राशि में वृद्धि, युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाएं, निवेश संवर्धन, वैश्विक क्षमता केंद्र, कृषि व बागवानी क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला का ढांचा, प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण और क्रेडिट कार्ड कारोबार में संरचनात्मक बदलाव शामिल हैं।