राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास (एनआईसीडीआईटी) के शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को महज कागजी मंजूरी देने के बजाय तय समयसीमा के भीतर निवेश आकर्षित करना और उत्पादन शुरू कराना प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। केंद्रीय मंत्रियों ने जोर देकर कहा कि औद्योगिक प्रगति की वास्तविक सार्थकता तभी है जब परियोजनाएं जमीन पर उतरकर ठोस आर्थिक गतिविधियों का रूप लें।
बैठक के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य सरकारों से अपील की कि वे औद्योगिक परियोजनाओं के मार्ग में आने वाली भूमि आवंटन, बिजली-पानी, परिवहन संपर्क और वैधानिक अनुमतियों से जुड़ी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करें। उन्होंने सुनियोजित विकास के लिए ‘पीएम गतिशक्ति’ के उपयोग और निवेशकों के लिए सुगम भूमि आवंटन व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने का आह्वान किया।
वित्त मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि समग्र औद्योगिक विकास केवल फैक्टरी परिसरों तक सीमित नहीं रह सकता। इसमें श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुरक्षा, कौशल संवर्धन, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सामाजिक सुविधाओं का समन्वित विकास भी शामिल होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार पूंजीगत व्यय में वृद्धि, राज्यों को संसाधन आवंटन, विनिर्माण क्षेत्र के एमएसएमई को ऋण सहायता तथा कर एवं सीमा शुल्क सुधारों के माध्यम से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और विनिर्माण को मजबूती प्रदान कर रही है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भावी औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति से जोड़कर समन्वित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाकर देश और क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक एन्क्लेव तैयार किए जाने चाहिए। साथ ही, निवेशकों को प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचा, बहुमंजिला कारखाने (फ्लैटेड फैक्ट्री), श्रमिक आवास और संपूर्ण सामाजिक इकोसिस्टम उपलब्ध कराना जरूरी है।
लॉजिस्टिक्स सुधारों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जलमार्गों को औद्योगिक परिवहन की रीढ़ बनाने से माल ढुलाई लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की बाजार क्षमता, स्थानीय संसाधनों और कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर वहां औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार पर बल दिया।
बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने राज्यों से परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों (एसपीवी) को प्रशासनिक और वित्तीय रूप से सशक्त बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए इन इकाइयों को योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए।