भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पुणे में आयोजित सातवीं ब्रिक्स सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) कार्य समूह की बैठक में सदस्य देशों के साथ डिजिटल साझेदारी और आगामी संचार प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
सम्मेलन के दौरान दूरसंचार विभाग के सचिव अमित अग्रवाल ने आईसीटी क्षेत्र के लिए भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आईसीटी ट्रैक का केंद्रीय विषय “लचीले भविष्य के लिए नवाचार, सहयोग और बदलाव” तय किया गया है, जो भारत की समग्र ब्रिक्स अध्यक्षता के मुख्य विषय “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की दिशा में कार्य करता है।
दूरसंचार सचिव ने उल्लेख किया कि पुणे में हो रहा यह सत्र पिछले कई महीनों से जारी निरंतर सहयोग का परिणाम है। भारत के नेतृत्व में कार्यभार शुरू होने के बाद से सदस्य देशों के विशेषज्ञों और अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ताएं, विषय-आधारित विमर्श और नीतिगत प्रस्तावों की समीक्षा हुई है। इन प्रयासों से सदस्य देशों को अपने अनुभव साझा करने, प्राथमिकताओं पर सहमति बनाने और एक व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिली है।
बैठक में ‘ब्रिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचर नेटवर्क्स’ की परिषद ने विभिन्न देशों में स्थित अपनी शाखाओं की गतिविधियों का जायजा लिया। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अगली पीढ़ी की संचार व्यवस्था, इंडस्ट्री 4.0 में इंटरनेट के प्रयोग और विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र (ईएमएफ) के प्रभावों का अध्ययन कर रहे विशेषज्ञ समूहों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों द्वारा भेजी गई प्रश्नावली के उत्तरों के आधार पर प्राथमिकताओं और रणनीतियों का विश्लेषण किया गया। भारत की अगुवाई में शुरू हुए इस आईसीटी सहयोग तंत्र के आगामी चरण में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) और डिजिटल ब्रिक्स कार्यबल की बैठक पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा।