राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने मंगलवार को लोकभवन स्थित सांदीपनि सभागार में डॉ. बी. आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के युवाओं को समसामयिक परिस्थितियों के अनुसार जागरूक, स्वस्थ और सशक्त बनाकर ही विकसित भारत के संकल्प को पूरा किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा कमजोर और वंचित तबकों के कल्याण के लिए एक वरदान समान है। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की भलाई के लिए लगातार चिंतन और अनुसंधान किया जाए। विशेष रूप से प्रदेश के बैगा, भारिया और सहरिया जैसे अति पिछड़े जनजातीय समुदायों के शैक्षणिक विकास और सशक्तिकरण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाए।
बैठक में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय और समरसता के सिद्धांतों से व्यावहारिक रूप से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि वे समाज सुधार की भावना से ओतप्रोत होकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहे ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ में संस्थान की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया और ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर शैक्षणिक नवाचारों को गति देने को कहा।
संस्थान के विकास पर चर्चा करते हुए श्री पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय को आधुनिक व वैश्विक स्तर के पाठ्यक्रमों के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एससी-एसटी वर्ग के शैक्षणिक विकास हेतु स्वीकृत बजट का सदुपयोग नियमानुसार और तय समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
विश्वविद्यालय की आर्थिक आत्मनिर्भरता के संदर्भ में उन्होंने पूर्व विद्यार्थियों को संस्थान की प्रगति से जोड़ने और सामाजिक व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने की सलाह दी। बैठक में कुलगुरू डॉ. रामदास अत्राम द्वारा राज्यपाल के स्वागत के उपरांत प्रभारी कुलसचिव ने प्रबंधन, अधोसंरचना और नए प्रस्तावों की जानकारी दी। उच्च शिक्षा अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन एवं वित्त सचिव लोकेश जाटव ने आवश्यक प्रशासकीय व वित्तीय सुझाव दिए। इस बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव डॉ. गुलशन बामरा तथा उप सचिव सुनील दुबे सहित प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।