केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार सौर पैनल विनिर्माण के अहम अवयव पॉलीसिलिकॉन के लिए एक सब्सिडी योजना पर विचार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही सोलर पैनल निर्माण की क्षमताओं को विस्तार देना है।
राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों से बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि पूर्व में पॉलीसिलिकॉन के लिए लाई गई पीएलआई योजना के माध्यम से घरेलू स्तर पर बहुत व्यापक क्षमता का निर्माण नहीं हो पाया था। इसी कारण नई सब्सिडी नीति पर काम शुरू किया गया है। चूंकि यह योजना अभी विचाराधीन है, इसलिए उन्होंने इसके तकनीकी या वित्तीय विवरणों पर तत्काल कोई ब्योरा नहीं दिया।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के संदर्भ में नीतिगत रुख स्पष्ट करते हुए सारंगी ने कहा कि प्रस्तावों के लिए डीपीआर प्रस्तुत करने से पहले प्रबंधन योजना बनाना अनिवार्य शर्त है। यह योजना सुनिश्चित करेगी कि परियोजना क्षेत्र की जैव विविधता, जलीय पर्यावरण और वहां पहले से सक्रिय मछुआरा समुदाय की आजीविका पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
अधिकारी ने रांची स्थित गेटलसुद जलाशय में एसईसीआई द्वारा संचालित 100 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर संयंत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां स्थानीय मछुआरों की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए विस्तृत प्रबंधन योजना के तहत केज फिशरीज (पिंजरा मत्स्य पालन) को प्रोत्साहित किया गया है, ताकि उनकी आमदनी में इजाफा हो सके।
अंत में उन्होंने बताया कि देश में सौर ऊर्जा क्षमता के सुचारू उपयोग और ग्रिड को सशक्त करने के लिए भारत बैटरी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजीगत निवेश बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।