भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों की पहली बैठक शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावी चुनौतियों के मद्देनजर रणनीति तैयार करना और धरातल पर जनता के बीच पार्टी की उपस्थिति को अधिक प्रभावी बनाना था।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य केंद्र आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारी, बूथ स्तर पर संगठन का सुदृढ़ीकरण और सरकार की विभिन्न योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना रहा। संगठन की इस प्राथमिक बैठक के अतिरिक्त भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और पार्टी प्रभारियों के साथ भी अलग से बैठकों की रूपरेखा तय की गई है।
भाजपा ने हाल ही में नितिन नबीन की अगुवाई में अपनी नयी राष्ट्रीय टीम की घोषणा की है, जिसमें कुल 65 पदाधिकारियों में से 51 नए चेहरों को मौका दिया गया है। वर्ष 2015 में तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के समय हुए संगठनात्मक बदलाव के बाद इसे बीते एक दशक का सबसे बड़ा फेरबदल बताया जा रहा है। इस पूरी संरचना में 12 महिलाओं और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े 6 नेताओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
संगठन के शीर्ष पदों पर 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी राम माधव को शामिल किया गया है। 8 महासचिवों की सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को स्थान मिला है, जबकि बी.एल. संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) और विनोद तावड़े व सुनील बंसल राष्ट्रीय महासचिव के रूप में अपनी भूमिकाओं में बने रहेंगे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जो मई 2014 में सरकार बनने से पूर्व भी इसी दायित्व पर थे।
इसके साथ ही आईटी विभाग के प्रभारी पद से अमित मालवीय को हटाकर छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को यह प्रभार सौंपा गया है, जबकि युवा मोर्चा में सांसद तेजस्वी सूर्या की जगह गुजरात के हेमांग जोशी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संगठन में हुए इस बड़े पैमाने के बदलाव के बाद अब राजनीतिक गलियारों में केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।