भारतीय रेलवे ने 21 अगस्त की शाम 7 बजे मुंबई के निकट स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (जेएनपीटी) से वडोदरा मंडल के वरणामा स्थित कॉनकोर जीसीटी टर्मिनल के लिए पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन का सफल संचालन किया। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) पर संचालित इस विशेष मालगाड़ी ने करीब 422 किलोमीटर का सफर तय करते हुए कुल 360 टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) कंटेनरों की ढुलाई की। एक ही फेरे में माल वहन क्षमता बढ़ाने के लिहाज से इसे रेलवे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस लॉन्ग-हॉल ट्रेन का निर्माण दो डबल-स्टैक रैक को आपस में जोड़कर किया गया था। मार्ग के अग्रिम हिस्से में चल रहे रैक को 45+1 लोड संयोजन के साथ लोकोमोटिव संख्या 60311 द्वारा खींचा गया, जिसका कुल भार 1,817 टन था। वहीं, पिछले हिस्से में जुड़े दूसरे रैक में भी 45+1 का लोड संयोजन था, जिसे लोकोमोटिव संख्या 24690 द्वारा संचालित किया गया और इसका वजन 2,105 टन दर्ज किया गया। दोनों रैक में 180-180 टीईयू कंटेनर शामिल थे, जिससे कुल संख्या 360 टीईयू तक पहुंच गई।
इस नई व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य जेएनपीटी और अन्य संबंधित माल टर्मिनलों से कंटेनरों की निकासी प्रक्रिया को अधिक तीव्र और सुगम बनाना है। एक ही ट्रेन के माध्यम से व्यापक स्तर पर माल भेजे जाने से टर्मिनलों पर अनावश्यक जमावड़े से राहत मिलेगी और कंटेनरों का प्रतीक्षा समय भी कम होगा। उच्च वहन क्षमता के चलते समान मात्रा में माल परिवहन के लिए कम डिब्बों की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे मौजूदा रेल ट्रैक क्षमता का समुचित उपयोग होगा और माल ढुलाई के कुल समय में बचत होगी।
बिजली से संचालित होने के कारण इस ट्रेन का सकारात्मक प्रभाव सड़क यातायात और पर्यावरण पर भी पड़ेगा। रेल आधारित इस माध्यम से डीजल चालित सड़क परिवहन पर निर्भरता में कमी आएगी। एक ही ट्रेन द्वारा भारी मात्रा में कंटेनरों की ढुलाई होने से राजमार्गों पर ट्रकों की संख्या घटेगी, जिससे न केवल डीजल की खपत पर अंकुश लगेगा बल्कि सड़कों पर जाम की समस्या और वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी दर्ज की जाएगी।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश के समर्पित माल गलियारों पर माल वहन क्षमता और कार्यकुशलता को अधिक मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जेएनपीटी से वरणामा तक का यह सफल संचालन रेखांकित करता है कि डबल-स्टैक और लॉन्ग-हॉल ट्रेनें प्रमुख बंदरगाहों को देश के आंतरिक हिस्सों से सुदृढ़ता से जोड़ने और कंटेनर लॉजिस्टिक्स तंत्र की क्षमता के विस्तार में प्रभावी भूमिका निभाएंगी।