मध्य प्रदेश पुलिस ने आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए वर्ष 2019 से अब तक कुल 70,107 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपने में सफलता प्राप्त की है। यह अभियान भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित ‘सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर’ (सीईआईआर) पोर्टल और राज्य पुलिस के सक्रिय समन्वय के तहत पूरा किया गया।
पुलिस विभाग के अनुसार, यह उपलब्धि केवल डिजिटल प्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि मैदानी स्तर पर तैनात पुलिस इकाइयों की निरंतर सक्रियता का भी परिणाम है। तकनीकी टीमों द्वारा संदिग्ध उपयोगकर्ताओं का विश्लेषण करने, उनसे संपर्क साधने और तकनीकी सूचनाओं का फील्ड स्तर पर भौतिक सत्यापन करने के बाद ही इन उपकरणों की बरामदगी संभव हो सकी।
सीईआईआर प्रणाली आईएमईआई (इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) नंबर के माध्यम से गुम अथवा चोरी हुए हैंडसेट की निगरानी और पहचान करती है। पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद संबंधित मोबाइल जैसे ही नेटवर्क पर सक्रिय होता है, पुलिस को उसकी लोकेशन और तकनीकी विवरण प्राप्त हो जाते हैं। फोन बरामद होने के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया के तहत ‘अनब्लॉक रिक्वेस्ट’ भेजी जाती है, जिससे नागरिक अपने हैंडसेट का दोबारा वैध उपयोग कर सकें।
बरामदगी के मामले में प्रदेश के शीर्ष 10 जिलों और नगरीय इकाइयों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल नगरीय 4,684 मोबाइलों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद ग्वालियर में 4,293, मंडला में 3,667, जबलपुर में 3,539, रीवा में 2,784, विदिशा में 2,672, इंदौर नगरीय में 2,613, छतरपुर में 2,584, सिंगरौली में 2,466 तथा भिंड में 2,375 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीकों के समावेश से आपराधिक जांच त्वरित और सटीक हुई है, जिससे चोरी के फोनों के पुनः उपयोग पर भी रोक लगी है। मध्य प्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने उपकरण का आईएमईआई नंबर सुरक्षित रखें और किसी भी अप्रिय स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उनकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।