चीनी की खुदरा कीमतों में हालिया उछाल के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए आश्वस्त किया कि देश में चीनी की आपूर्ति का कोई संकट नहीं है और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को घटती कीमतों से राहत मिलेगी। उद्योग निकाय का कहना है कि कीमतों में दिख रही तेजी वास्तविक किल्लत नहीं, बल्कि सट्टेबाजी और बाजार की धारणा का परिणाम है।
आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, पिछले 15-20 दिनों के दौरान कीमतों में हुई वृद्धि के लिए बाजार में घबराहट के चलते की गई खरीदारी मुख्य रूप से जिम्मेदार है। पिछले सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश में लाल सड़न बीमारी और समय से पहले गन्ने में फूल आने से उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कम उपलब्धता के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़े दामों ने भी स्थानीय धारणा को प्रभावित किया।
उत्पादन परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि चालू 2025-26 चीनी सत्र में देश का शुद्ध उत्पादन 279 लाख टन रहने का अनुमान है। तमिलनाडु और दक्षिण कर्नाटक में विशेष पेराई सत्र चलने से उत्पादन में अतिरिक्त इजाफा हो रहा है। 30 सितंबर को सीजन समाप्त होने तक करीब 35 लाख टन का अधिशेष (क्लोजिंग स्टॉक) मौजूद रहेगा, जो किसी भी प्रकार की आपूर्ति संबंधी चिंता को दूर करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।
वहीं, उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने इथेनॉल उत्पादन को कीमतों में वृद्धि का कारण मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि इथेनॉल आपूर्ति में चीनी उद्योग की हिस्सेदारी शुरुआती 80 फीसदी से घटकर अब लगभग 28 फीसदी रह गई है। सरकारी नीति में घरेलू खपत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, उसके बाद ही इथेनॉल और निर्यात का स्थान आता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मिलों और गोदामों में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और सरकारी उपायों का असर जल्द बाजार में नजर आएगा।