पड़ोसी देश नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर सहायता पहुंचाई जा रही है। संकट की इस घड़ी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 150,000 अमेरिकी डॉलर की फौरी मदद देने की घोषणा की है, जबकि भारत सरकार ने शुक्रवार को काठमांडू के लिए अपनी तीसरी विशेष मानवीय सहायता उड़ान रवाना की।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के अनुसार, जमीनी स्तर पर नुकसान और जरूरतों के आकलन के साथ अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर 10,000 लोगों के लिए 3 महीने तक चलने वाली आपात स्वास्थ्य सामग्री, टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर प्रभावित इलाकों में भेज दिए गए थे।
डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने जोर देकर कहा कि इस समय मुख्य ध्यान प्रभावित बस्तियों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाधित चिकित्सा ढांचे को पटरी पर लाने पर है। संगठन नेपाल सरकार की अगुवाई में अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ तकनीकी सहयोग और निगरानी की व्यवस्था भी संभाल रहा है ताकि जनस्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।
इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि नेपाल की मदद के लिए नई दिल्ली से तीसरी उड़ान रवाना हो चुकी है, जिसमें 10 टन से अधिक राहत सामग्री और विशेषज्ञ कर्मी मौजूद हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि राहत सामग्री में पोर्टेबल जनरेटर, फूड पैकेट्स, डिग्निटी किट्स और जल शोधक गोलियां शामिल हैं। साथ ही राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए 11 डॉक्टरों और पैरामेडिक्स का दल तथा सुरंग बचाव अभियान के लिए एक रेकी टीम भी भेजी गई है। भारत संकटग्रस्त नेपाल को लगातार हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है।