केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पीएम-प्रगति के तत्वावधान में देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया। बैठक में राष्ट्रीय लक्ष्य की समयबद्ध प्राप्ति के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के एकीकृत सहयोग को विस्तार देने पर मुख्य रूप से चर्चा की गई।

समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि समय रहते लक्षणों की पहचान, स्क्रीनिंग, जन-भागीदारी और जमीनी स्तर पर रोकथाम की व्यवस्था को मजबूत करके ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। इस पहल को जन-आंदोलन बनाने के लिए खेल मंत्रालय के ‘माई भारत’ स्वयंसेवियों और रक्षा मंत्रालय के एनसीसी कैडेट्स को सक्रिय किया गया है। दूसरी ओर, संगठित क्षेत्र के कामगारों की जांच के लिए ईएसआईसी को जोड़ा गया है तथा शिक्षण संस्थानों में भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि समाज के हर हिस्से तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।

स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र के विकास कार्यों का भी निरीक्षण किया। बैठक में संस्थान की डिजिटल प्रणाली, बुनियादी ढांचे, चिकित्सकीय स्टाफ की तैनाती, रोगी सेवाओं और अकादमिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने 13 अप्रैल 2026 की बैठक में तय किए गए लक्ष्यों के क्रियान्वयन की स्थिति देखते हुए निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी सामंजस्य से रुके हुए कार्यों को अविलंब पूरा करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसाधनों की समय पर आपूर्ति, सख्त प्रशासनिक निगरानी और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

नजफगढ़ का यह स्वास्थ्य केंद्र आधुनिक जन-स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस है, जहां ओपीडी और 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ रेबीज निवारक केंद्र, सर्पदंश उपचार सुविधा, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, सीएसडी और डायग्नोस्टिक लैब पूरी क्षमता से संचालित हो रहे हैं। यहां सामान्य सर्जरी के लिए लघु शल्य चिकित्सा कक्ष की व्यवस्था भी उपलब्ध है।

प्रशासनिक और तकनीकी सुधार के तहत संस्थान को डिजिटल मेडिको-लीगल रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म (मेडलीप-आर) और आयुष्मान भारत (पीएम-जेएवाई) योजना से संबद्ध किया गया है, जिससे मरीजों को कैशलेस और पारदर्शी उपचार मिल रहा है। केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाणीकरण प्राप्त कर एक मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

मासिक स्तर पर यह ग्रामीण केंद्र औसतन 47,000 बाह्य रोगियों और 9,000 आपातकालीन मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दे रहा है, जबकि अगस्त 2026 के दौरान यहां 221 छोटी शल्य प्रक्रियाएं की गईं। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र की दैनिक ओपीडी और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच में टीबी स्क्रीनिंग को भी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया है।

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