केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी दी कि मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान में भारत की त्वरित भुगतान प्रणाली यूपीआई की शुरुआत कर दी गई है, जिसके जरिए वहां जाने वाले भारतीय पर्यटक, विद्यार्थी और कारोबारी अब क्यूआर कोड स्कैन करके तत्काल सीमा-पार मर्चेंट भुगतान कर सकेंगे।
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय शाखा एनआईपीएल ने 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की भुगतान प्रणाली ‘एचयूएमओ’ का संचालन करने वाली संस्था ‘नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर जेएससी’ (एनआईपीसी) के साथ एक वाणिज्यिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान के द्विपक्षीय दौरे के दौरान की गई।
इस नई व्यवस्था के तहत भारतीय यात्री अपने नियमित यूपीआई ऐप्स के माध्यम से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड ‘यूजेडक्यूआर’ को स्कैन करके पूरे देश में मर्चेंट लेनदेन कर सकेंगे। इस प्रक्रिया को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और उज्बेकिस्तान के केंद्रीय बैंक (सीबीयू) से आवश्यक औपचारिक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। सीबीयू ने सीमा-पार मर्चेंट भुगतान स्वीकार करने के उद्देश्य से एचयूएमओ को एनआईपीएल का अधिकृत सहयोगी बनाया है।
सीबीयू के एकीकृत राष्ट्रीय क्यूआर ढांचे से जुड़ने के कारण भारतीय नागरिकों को उज्बेकिस्तान के रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र के लगभग सभी व्यापारियों पर भुगतान करने की सहूलियत मिलेगी। सीधे भारतीय बैंक खातों से पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) भुगतान होने से विदेशी मुद्रा विनिमय पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी, साथ ही नकदी और अंतरराष्ट्रीय कार्ड पर निर्भरता भी कम होगी।
यह कदम डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में दोनों राष्ट्रों के बीच सहयोग को गति देने के साथ-साथ उनके व्यापक आर्थिक और रणनीतिक लक्ष्यों के अनुकूल है। इससे पूर्व बीते महीने मालदीव के त्वरित भुगतान नेटवर्क ‘फवारा’ और भारत के यूपीआई के एकीकरण की घोषणा हुई थी। उज्बेकिस्तान से पहले सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस सहित 10 देशों में यूपीआई का संचालन शुरू किया जा चुका है।