मानव कल्याण और लोकहित से जुड़ी शिक्षा ही वास्तविक ज्ञान: कुशाभाऊ सभागार में बोले राज्यपाल

मानव कल्याण और लोकहित से जुड़ी शिक्षा ही वास्तविक ज्ञान: कुशाभाऊ सभागार में बोले राज्यपाल

राजधानी के कुशाभाऊ सभागार में मंगलवार को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान’ विषयक कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारत की ज्ञान प्रणाली का अंतिम ध्येय सदैव मानवता का कल्याण और सत्य की साधना रहा है। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस सत्र में उच्च शिक्षा से जुड़े कई वरिष्ठ नीति-निर्माता और शिक्षाविद उपस्थित रहे।

राज्यपाल पटेल ने इस बात को रेखांकित किया कि भारतीय जीवन दर्शन में प्रकृति और ब्रह्मांड को हमेशा अभिन्न स्थान प्राप्त रहा है। वैदिक और पौराणिक वांग्मय से लेकर रामायण-महाभारत जैसे महाग्रंथों तक, हर स्थान पर प्रेम, त्याग, मर्यादा और नैतिक मूल्यों की स्पष्ट सीख मिलती है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा की कि वे इन अमर जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। इसके अतिरिक्त, आयोजकों को सुझाव दिया गया कि वे नियमित रूप से ऐसी कार्यशालाओं की समीक्षा करें ताकि आने वाले समय की शैक्षणिक चुनौतियों का समय रहते ठोस समाधान खोजा जा सके।

राज्यपाल ने रेखांकित किया कि चरक और सुश्रुत की स्वास्थ्य पद्धति तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी प्राचीन काल में थीं। उन्होंने कहा कि वास्तविक विद्या वही है जो मनुष्य को अज्ञानता और मानसिक बंधनों से मुक्ति दिलाकर “सब सुखी हों” की भावना को चरितार्थ करे।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमारी ऐतिहासिक ज्ञान संपदा को मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल करने का बड़ा अवसर लाई है। उन्होंने सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के मध्य ठोस समन्वय की वकालत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को वैज्ञानिक प्रमाणिकता के साथ अपने पूर्वजों के ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना चाहिए और विद्यार्थियों के लिए जीवनोपयोगी पाठ्य सामग्री बनानी चाहिए।

सत्र के दौरान शिक्षा संस्कृति और उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने इस दिशा में राज्य की सक्रियता की सराहना की। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया, तथा हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने ज्ञान परंपरा पर केंद्रित प्रकाशनों का ब्योरा दिया। आरंभ में विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेमसिंह डेहरिया व निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने राज्यपाल का अभिनंदन किया, जबकि अंत में संघ के सचिव डॉ. अजीत सिंह पटेल ने सभी अतिथियों का आभार जताया।

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